नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में एक छोटी सी जॉब करता हूँ। पिछले महीने मुझे अपने गांव जाना पड़ा क्योंकि पापा की तबीयत खराब थी। गांव हरियाणा के एक छोटे से इलाके में है, जहां खेतों की भरमार है। वहां पहुंचकर मुझे पता चला कि हमारे पड़ोस में एक नई ब्याहता भाभी रहती है, जिसका नाम मीरा है। मीरा की उम्र करीब 28 साल होगी, शरीर काफी मोटा-तगड़ा, गोरा रंग, भारी-भारी स्तन और सबसे खास उसकी मोटी-मोटी गांड। वो अक्सर खेतों में डींग मारती रहती थी। लोग उसे "देसी खद वाली भाभी" कहकर पुकारते थे क्योंकि उसके पति का देसी खद का छोटा सा बिजनेस था।
एक दिन सुबह मैं खेतों की तरफ निकला तो मीरा भाभी को खद के ढेर के पास खड़े देखा। वो लाल रंग की साड़ी में थी, पल्लू थोड़ा सरका हुआ था जिससे उसके गहरे नाभि और मोटे स्तन साफ दिख रहे थे। मैं पास गया तो उसने मुस्कुराते हुए कहा, "अरे राहुल बेटा, दिल्ली से आया है? खद देखने आया क्या?" मैंने हंसकर कहा, "नहीं भाभी, बस घूमने निकला था।" लेकिन उसकी देसी खुशबू और मोटी कमर देखकर मेरा लंड पहले से ही खड़ा हो रहा था।
मीरा भाभी ने मुझे अपने घर बुलाया। घर छोटा सा था, अंदर जाकर उसने पानी पिलाया। बातों-बातों में उसने बताया कि उसका पति अक्सर बाहर रहता है। "राहुल, अकेलेपन से तो जान निकल जाती है," वो बोली। मैंने साहस करके कहा, "भाभी, अगर आप चाहो तो मैं मदद कर सकता हूं।" उसकी आंखों में चमक आई। वो मेरे पास आई और सीधे मेरे लंड पर हाथ रख दिया। "ये क्या है राहुल? इतना सख्त क्यों हो गया?" उसने फुसफुसाते हुए कहा।
मैंने उसे दीवार से लगाया और उसके होंठों पर अपना मुंह लगा दिया। हम दोनों जोर से चूमने लगे। उसकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा तो उसके भारी स्तन बाहर आ गए। काले रंग की ब्रा के अंदर से बड़े-बड़े निप्पल साफ दिख रहे थे। मैंने ब्रा उतारी और एक स्तन मुंह में भर लिया। चूसते-चूसते मैंने दूसरे स्तन को मसलना शुरू किया। मीरा भाभी चीखने लगी, "आह्ह्ह राहुल… मेरे स्तन चूस ले… ये देसी खद वाली भाभी की चूचियां तेरे लिए ही हैं।"
उसने मेरी पैंट खोली और मेरा मोटा लंड बाहर निकाल लिया। "वाah, कितना बड़ा और काला लंड है तेरा! देसी खद जितना गाढ़ा!" वो बोली और तुरंत घुटनों पर बैठकर लंड चूसने लगी। उसकी गर्म सांसें मेरे लंड पर पड़ रही थीं। वो लंड को पूरा मुंह में लेकर चूस रही थी, जीभ से लंड के नीचे वाले हिस्से को चाट रही थी। "भाभी, और जोर से चूसो… मेरा रस पी लो," मैंने कहा। वो और तेजी से चूसने लगी, थूक से लंड चमक रहा था।
फिर मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। साड़ी पूरी उतार दी। उसकी मोटी जांघें फैलाईं तो उसकी गीली-गीली चूत सामने आ गई। बालों वाली चूत, होंठ फूले हुए और अंदर से गुलाबी। मैंने उंगली डाली तो "आह्ह्ह" की आवाज निकली। "राहुल, मेरी चूत चाट… देसी खद वाली चूत को चाट ले," वो बोली। मैंने मुंह लगाया और उसकी चूत चाटने लगा। उसका स्वाद खट्टा-मीठा था। मैं जीभ से क्लिट को रगड़ रहा था। मीरा भाभी मेरे सिर को दबा रही थी, "और अंदर… हां, मेरी चूत फाड़ दे।"
उसके बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार झटका मारा। "आह्ह्ह मादरचोद… पूरा लंड घुसा दे!" वो चीखी। मेरा लंड उसकी तंग चूत में घुस गया। वो बहुत गीली थी। मैं जोर-जोर से चोदने लगा। "थप-थप" की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उसके स्तनों को हाथों में लिया और चोदते हुए चूसने लगा। "भाभी, तेरी चूत कितनी गर्म है… देसी खद जितनी गाढ़ी!"
हमने पोजीशन बदली। वो मेरे ऊपर चढ़ गई। उसकी मोटी गांड मेरे लंड पर घूम रही थी। वो ऊपर-नीचे होने लगी। "राहुल, मेरी गांड भी मार… पहले चूत फाड़, फिर गांड!" वो बोली। मैंने उसे घुमाया, कुत्ते वाली पोजीशन में लिटाया। उसकी गांड के दो टुकड़े अलग करके लंड डाला। गांड थोड़ी तंग थी लेकिन गीली चूत के रस से आसानी से घुस गया। "आह्ह्ह… मेरी गांड फट गई… चोद मुझे!" वो चिल्ला रही थी। मैं जोर-जोर से उसकी गांड मार रहा था, थप्पड़ मार-मारकर लाल कर दिया।
हम दोनों पसीने से तर हो गए थे। मीरा भाभी बार-बार झड़ रही थी। उसका रस मेरे लंड पर बह रहा था। मैंने भी अंत में जोर से झटका मारा और उसकी चूत में अपना गाढ़ा रस भर दिया। "ले भाभी, मेरा रस पी ले तेरी चूत!"
लेकिन ये खत्म नहीं हुआ। हमने दोबारा शुरू किया। इस बार बाथरूम में। नहाते हुए उसने मुझे दीवार से लगाकर लंड चूसा। फिर फर्श पर लिटाकर चोदा। पूरी रात हम चोदते रहे। सुबह तक उसकी चूत और गांड दोनों लाल हो चुकी थीं। वो बार-बार कह रही थी, "राहुल, अब रोज आना… देसी खद वाली भाभी तेरी गुलाम है।"
इसके बाद के दिनों में जब भी मौका मिलता, हम मिलते। खेत में खद के ढेर के पीछे, उसके घर में, यहां तक कि उसके पति के आने से पहले भी। हर बार वो नई-नई पोजीशन आजमाती। कभी वो मेरे मुंह पर बैठकर चूत चुसाती, कभी मैं उसकी मोटी जांघों को कंधे पर रखकर चोदता। उसकी चूत हमेशा गीली रहती, जैसे देसी खद की नमी।
एक बार बारिश में हम खेत में ही चोदे। बारिश के पानी में हमारे शरीर चिपक गए। उसकी साड़ी भीग गई, स्तन साफ दिख रहे थे। मैंने साड़ी फाड़कर सीधे चूत में लंड डाल दिया। बारिश की बूंदें हमारे चेहरे पर गिर रही थीं, लेकिन हम रुकते नहीं थे। "राहुल, बारिश में भी मेरी चूत सूख नहीं रही… तेरे लंड से ही भिगो!" वो चीख रही थी।
धीरे-धीरे ये अफेयर गांव में चर्चा का विषय बन गया लेकिन हमने सावधानी बरती। मीरा भाभी अब रोज मेरे लिए देसी खद ले आती, लेकिन असली मजा तो उसकी चूत और गांड मारने में था। उसका शरीर अब मेरे लिए खुला किताब था। हर छेद, हर मोड़, हर रस मैंने चख लिया।
अंत में जब मैं दिल्ली लौटा तो मीरा भाभी ने विदा करते हुए कहा, "राहुल, अगली बार आना… तेरी देसी खद वाली भाभी इंतजार करेगी।" और मैंने वादा किया कि जरूर आऊंगा, क्योंकि उसकी मोटी चूत और गाढ़ा रस मुझे भूल नहीं सकता था।
(कहानी समाप्त, लेकिन यादें हमेशा ताजा रहेंगी।)