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**Dewas Wali Mata Ke Gane – Bhajan Ke Baad Ki Chudai** — संपादकीय चयन

**Dewas Wali Mata Ke Gane – Bhajan Ke Baad Ki Chudai** — संपादकीय चयन

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं इंदौर का रहने वाला हूँ लेकिन पिछले साल देवास में माता के मंदिर में एक प्रोग्राम में गया था। माता रानी के गाने सुनने का मौका मिला था और वो गाने सुनते-सुनते मेरी जिंदगी ही बदल गई। वो रात इतनी गंदी, इतनी मोटी-मोटी चुदाई वाली थी कि आज भी याद करके लंड खड़ा हो जाता है।

मंदिर के बाहर बारिश हो रही थी। देवास की वो छोटी सी बस्ती, माता की मूर्ति के सामने भजन मंडली बैठी हुई थी। औरतें सफेद साड़ी में, माथे पर चंदन, लेकिन उनकी आवाजें इतनी रसीली थीं कि सीधा दिल को छू जाती थीं। मैं अकेला खड़ा था, स्कूटर पर। तभी एक औरत मेरी तरफ आई। उम्र करीब ३८-४० साल, नाम था सुनीता। मोटी-तगड़ी कद-काठी, भारी-भारी स्तन जो साड़ी के ब्लाउज में बंद होने को तैयार नहीं थे। गोरी नहीं, गेहुँआ रंग, लेकिन चेहरा ऐसा कि देखते ही मन करे कि उसकी मोटी-मोटी जांघों के बीच मुंह मार दूं।

“भाई, बारिश में भीगोगे। अंदर आ जाओ,” उसने कहा। आवाज में वो मिठास थी जो भजन गाने वाली औरतों में होती है। मैं अंदर गया। भजन चल रहा था – “देवास वाली माता रे, तेरे चरणों में…” सुनीता भी गा रही थी। उसकी आवाज में इतना जज्बा था कि मेरा लंड धीरे-धीरे तनने लगा।

भजन खत्म होने के बाद सब लोग चले गए। सिर्फ सुनीता और मैं रह गए। बारिश तेज हो गई थी। “तुम कहाँ रहते हो?” उसने पूछा। “इंदौर जाना है, लेकिन स्कूटर में बारिश…” “मेरे घर चलो, रात भर रुक जाओ।”

उसका घर मंदिर के पीछे छोटा सा था। अंदर जाते ही उसने दरवाजा बंद किया। “पहले कपड़े बदल लो, भीग गए हो।” वो खुद भी भीगी हुई थी। साड़ी शरीर से चिपक गई थी। उसके बड़े-बड़े स्तन साफ दिख रहे थे, निप्पल्स खड़े हो चुके थे। मैंने देखा और लंड और सख्त हो गया।

“क्या देख रहे हो?” उसने मुस्कुराते हुए कहा। “माता के भजन सुनते-सुनते मन में कुछ और ही चल रहा था ना?” मैं चुप रहा। उसने साड़ी का पल्लू सरका दिया। “आज रात देवास वाली माता के गाने के बाद तू मुझे चोदेगा।”

उसने ब्लाउज खोल दिया। दो मोटे, भारी स्तन बाहर निकल आए। काले-काले निप्पल, हल्का सा पसीना। मैंने हाथ बढ़ाया और एक स्तन दबा लिया। “अरे वाह, कितने सख्त हैं तेरे बोब्बे।” सुनीता हंस पड़ी। “चूस ले, चूस के लाल कर दे।”

मैं घुटनों पर बैठ गया और उसका दायाँ स्तन मुंह में ले लिया। चूसने लगा। जीभ से निप्पल घुमाया। सुनीता सिसकारियाँ लेने लगी। “हाँ राहुल, और जोर से चूस… मेरी मलाई पी ले…” दूसरा स्तन भी हाथ में लिया। दोनों हाथों से दबाते हुए चूस रहा था। उसकी सांस तेज हो गई।

फिर उसने मेरी पैंट खोली। लंड बाहर आया, पूरा तना हुआ, नसें उभरी हुई। “अरे वाह, कितना मोटा लंड है तेरा। देवास वाली माता ने आज बढ़िया तोहफा भेजा है।” उसने घुटनों पर बैठकर लंड मुंह में लिया। चूसने लगी। जीभ से लंड की नोक चाटी, फिर पूरा गले तक ले लिया। “छोड़… छोड़ के चूस रही हूँ तेरे लंड को…”

मैं उसके बाल पकड़कर मुंह में चोदने लगा। “ले, ले मेरी रंडी… भजन गाने वाली रंडी… तेरी मोटी-मोटी जीभ से लंड साफ कर…”

उसके बाद मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। साड़ी पूरी उतार दी। नीचे पेटीकोट था। उसे भी खींचा। अब वो सिर्फ ब्लाउज और चड्डी में थी। चड्डी गीली हो चुकी थी। “देख, तेरी चूत कितनी प्यासी है।” मैंने चड्डी उतारी। बालों वाली, मोटी चूत, होठ मोटे-मोटे, अंदर से गुलाबी। रस टपक रहा था।

मैंने मुंह मार दिया। जीभ से चूत चाटने लगा। “आह… राहुल… मेरी चूत चाट… माता के भक्त होकर भी इतना गंदा काम कर रहा है…” मैंने उसकी चूत के होठ खोले और अंदर जीभ डाली। चूसने लगा जैसे आम चूस रहा हो। सुनीता चीखने लगी। “हाँ… चूत का रस पी ले… और गहराई से चाट…”

फिर मैं ऊपर आया। लंड उसकी चूत पर रखा। “डाल… डाल अपना मोटा लंड मेरी चूत में…” एक जोर का झटका मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। “उफ्फ… कितना मोटा है… फाड़ देगी मेरी चूत…” दूसरा झटका। पूरा लंड अंदर। सुनीता चीख पड़ी। “आह… चोद… जोर-जोर से चोद मुझे…”

मैं चोदने लगा। जोर-जोर से धक्के। “तेरी चूत कितनी टाइट है… भजन गाने वाली चूत भी इतनी गरम…” सुनीता अपनी जांघें फैलाए लेटी थी। “हाँ… और जोर… मेरी गांद भी मार… आज पूरी रात चोदना…”

मैंने उसको उल्टा कर दिया। गांद ऊपर। मोटी-मोटी गांद, चूत के नीचे। लंड फिर चूत में डाला। एक हाथ से गांद थपथपाने लगा। “थप्पड़ मार… मेरी गांद लाल कर दे…”

लंबे समय तक चोदा। पसीना बह रहा था। सुनीता बार-बार झड़ रही थी। “राहुल… मैं झड़ गई… और चोद…”

फिर उसने मुझे लिटाया और खुद ऊपर चढ़ गई। लंड चूत में लिया और ऊपर-नीचे होने लगी। उसके भारी स्तन उछल रहे थे। मैं उन्हें दोनों हाथों से दबा रहा था। “देख कैसे चूत मार रही हूँ तेरे लंड पर… देवास वाली माता के गाने के बाद आज रात तेरी रंडी बन गई हूँ…”

दो घंटे तक चुदाई चली। अलग-अलग पोजीशन में। मुंह मारना, गांद चाटना, लंड चूसना, सब कुछ। आखिर में मैंने उसकी चूत में झड़ दिया। गरम-गरम माल अंदर भर दिया।

सुनीता मुस्कुराई। “कल फिर आना। माता के और गाने सुनाएंगे… और चोदेंगे भी।”

वो रात मेरी जिंदगी की सबसे गंदी और मजेदार रात थी। देवास वाली माता के गाने ने मुझे एक ऐसी औरत दी जिसकी चूत आज भी याद आती है।

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