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अभी देखें: Akshara Ka Natak 2019 – Bhabhi Ki Garam Chudai Ka Asli Natak

अभी देखें: Akshara Ka Natak 2019 – Bhabhi Ki Garam Chudai Ka Asli Natak

“अभी देखें: Akshara Ka Natak 2019 - Bhabhi Ki Garam Chudai Ka Asli Natak” हमारी नई कहानी चयन सूची का हिस्सा है। मुख्य जानकारी को जल्दी समझने, पूरी सामग्री देखने और संबंधित श्रेणियों तक पहुंचने के लिए व्यवस्थित किया गया है। सभी विवरण देखने के बाद समान विषय वाली अन्य चुनी हुई प्रविष्टियां भी पढ़ें।

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ और 2019 में मेरी उम्र 28 साल थी। मैं एक छोटी सी थिएटर कंपनी में काम करता था जहाँ स्क्रिप्ट लिखना और डायरेक्टिंग करना मेरा काम था। उसी साल हमने एक नया नाटक तैयार किया जिसका नाम था “अक्षरा का नाटक”। नायिका का रोल अक्षरा को मिला, जो 32 साल की हॉट और सेक्सी भाभी टाइप की औरत थी। उसकी शादी हो चुकी थी लेकिन पति विदेश में था। अक्षरा की बॉडी देखकर ही लंड खड़ा हो जाता था – भारी भरे स्तन, मोटी गोल गाँड़, पतली कमर और चिकनी गोरी त्वचा।

पहली रिहर्सल के दिन जब अक्षरा आई तो उसने टाइट जींस और कम गले की टॉप पहनी हुई थी। उसके स्तनों के उभार साफ दिख रहे थे। मैंने सोचा ये नाटक सिर्फ स्क्रिप्ट तक सीमित नहीं रहेगा। रिहर्सल के दौरान जब हम दोनों सीन रिहर्स कर रहे थे तो अक्षरा ने मुझे छूकर देखा। उसकी साँसें तेज थीं। “राहुल, ये सीन बहुत इंटीमेट है, थोड़ा और रियल बनाना है ना?” उसने फुसफुसाते हुए कहा। मैंने उसके कूल्हे पर हाथ रखा और बोला, “हाँ अक्षरा, असली चुदाई जैसा फील लाना है।”

उस रात रिहर्सल खत्म होने के बाद हम दोनों स्टूडियो में अकेले रह गए। बारिश हो रही थी और बाहर अंधेरा था। अक्षरा ने मुझसे कहा, “राहुल, मुझे सच में कोई ऐसा आदमी चाहिए जो मुझे अच्छे से चोदे। मेरा पति महीनों से नहीं आया।” मैंने तुरंत उसे दीवार से लगाया और उसके होंठों पर अपना मुँह मार दिया। हम दोनों जोर से चूमने लगे। उसकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई। मैंने उसके टॉप के अंदर हाथ डाला और उसके भारी स्तनों को निचोड़ा। अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह… राहुल, मेरे मम्मे दबाओ, चूसो इन्हें!”

मैंने उसका टॉप उतारा। उसके ब्रा के अंदर से 36D के गोरे-गोरे स्तन बाहर निकल आए। निप्पल्स सख्त और गुलाबी थे। मैंने एक स्तन मुँह में लिया और चूसने लगा जबकि दूसरा हाथ उसके पैंट में घुसा दिया। अक्षरा की चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने उसकी चूत के होठों को उँगलियों से फैलाया और क्लिट पर रगड़ने लगा। “ओह्ह्ह फक… राहुल, मेरी चूत में उँगली डालो, जोर से!” अक्षरा चीख रही थी। मैंने दो उँगलियाँ उसकी गर्म और चिपचिपी चूत में घुसा दीं। उसकी चूत का रस मेरे हाथ पर बह रहा था।

अक्षरा ने मेरी पैंट खोल दी और मेरा 7 इंच का मोटा लंड बाहर निकाला। “वाह, कितना बड़ा और सख्त लंड है!” उसने कहा और तुरंत घुटनों के बल बैठकर उसे मुँह में ले लिया। उसकी गर्म साँसें मेरे लंड पर पड़ रही थीं। अक्षरा ने लंड को चूसना शुरू किया – ऊपर नीचे, जीभ से लंड के सिरे को चाटते हुए। “चूसो अक्षरा, पूरा लंड गले तक ले लो,” मैंने कहा। उसने मेरे अंडकोष भी चूसे और लंड को गले में उतारने की कोशिश की। लार उसके मुँह से बह रही थी और मेरे लंड पर चिपक रही थी।

मैंने उसे उठाया और मेज पर लिटा दिया। उसकी जींस और पैंटी उतार दी। अक्षरा की चूत पूरी तरह गंजी और चमकदार थी, होंठ मोटे और गुलाबी, अंदर से गुलाबी मांस। मैंने उसके पैर फैलाए और मुँह लगाकर चूत चाटने लगा। “आह्ह्ह… राहुल, चूत चूसो, जीभ अंदर डालो!” अक्षरा चीख रही थी। मैंने उसकी चूत के रस को चाटा, क्लिट को काटा और जीभ से अंदर बाहर किया। अक्षरा का शरीर काँप रहा था। उसने मेरे बाल पकड़कर अपना चेहरा अपनी चूत में दबा लिया।

फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार झटके से अंदर घुसा दिया। “आह्ह्ह फक… इतना मोटा लंड!” अक्षरा चीख पड़ी। उसकी चूत बहुत टाइट थी। मैंने धीरे-धीरे शुरू किया फिर तेजी से चोदने लगा। “चोदो मुझे राहुल, मेरी चूत फाड़ दो!” अक्षरा बोल रही थी। हर धक्के के साथ उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उसके स्तनों को पकड़कर निचोड़ा और लंड को और गहराई तक मारा। अक्षरा का चूत का रस मेरे लंड पर बह रहा था और मेज पर गिर रहा था।

हमने पोजीशन बदली। अक्षरा ने कुत्ते वाली पोजीशन ली। मैंने उसके पीछे से लंड घुसाया। उसकी मोटी गाँड़ को थप्पड़ मारते हुए चोद रहा था। “थप्पड़ मारो, गाँड़ लाल कर दो!” अक्षरा चीख रही थी। मैंने उसकी गाँड़ के छेद में उँगली डाली और साथ में चूत में लंड मारा। अक्षरा का शरीर पसीने से तर हो गया था।

हम दोनों चरम सीमा पर पहुँच गए। अक्षरा का चूत सिकुड़ रहा था और उसने जोर से चीखते हुए झड़ गई। “राहुल… मैं झड़ रही हूँ!” मैंने भी अपना गरम वीर्य उसकी चूत में भर दिया। वीर्य बाहर निकलकर उसकी जांघों पर बह रहा था।

इसके बाद हमने पूरी रात चोदाई की – बाथरूम में, फर्श पर, कुर्सी पर। अक्षरा ने मुझे अपनी गाँड़ भी चुदवाई। “अब मेरी गाँड़ चोदो,” उसने कहा। मैंने लंड पर थूक लगाकर उसकी गाँड़ में घुसाया। अक्षरा दर्द से चीखी लेकिन फिर मजा लेने लगी। “जोर से, गाँड़ फाड़ दो!”

नाटक का शो 2019 में सफल रहा लेकिन हमारी चुदाई का नाटक अभी भी जारी था। अक्षरा अब भी कभी-कभी मिलने आती है और हम दोनों नई-नई पोजीशन में चोदाई करते हैं। उसकी चूत का स्वाद और उसके स्तनों का एहसास कभी नहीं भूलता।

(कहानी जारी… विस्तार के साथ और सीन जैसे ऑफिस में जल्दी चुदाई, बारिश में कार में, और अंत में दोनों का साथ में नहाना और फिर चोदाई। पूरी डिटेल में शरीर की हर हरकत, रस की आवाज, चीखें और गंदी बातें शामिल।)

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