नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं दिल्ली के एक छोटे से इलाके में रहता हूँ। उम्र मेरी 32 साल है और मैं एक छोटी सी कंपनी में अकाउंटेंट की नौकरी करता हूँ। मेरी जिंदगी काफी नॉर्मल चल रही थी जब तक कि मेरी पड़ोस वाली देवासी भजन वाली औरत ने सब कुछ बदल नहीं दिया। उसका नाम देवासी था, उम्र करीब 35 साल, लेकिन शरीर देखकर कोई 25 का ही कहेगा। गोल-गोल भारी स्तन, चौड़ी कमर, मोटी मोटी जांघें और गोल-गोल गोल चूतड़ जो चलते समय हिलते रहते थे। वो रोज शाम को मंदिर में भजन गाती थी। उसकी मीठी आवाज सुनकर पूरा मोहल्ला इकट्ठा हो जाता था, लेकिन मैं उसकी आवाज से ज्यादा उसके शरीर की भूखा था।
एक शाम बारिश हो रही थी। मंदिर बंद था तो देवासी ने अपने घर में छोटा सा भजन कार्यक्रम रखा। मैं भी चला गया। घर में सिर्फ 8-10 लोग थे। देवासी सफेद साड़ी में थी, लेकिन ब्लाउज इतना टाइट था कि उसके स्तनों की निप्पल्स की हल्की सी आउटलाइन दिख रही थी। भजन शुरू हुआ। “ओ पिया, तू ही मेरा…” वो गा रही थी और मैं उसकी आवाज में अपनी कल्पनाओं में खो गया। भजन खत्म होने के बाद सब चले गए। सिर्फ मैं और वो रह गए क्योंकि बारिश तेज हो गई थी।
“अर्जुन, बारिश में मत जाओ, रुक जाओ,” उसने कहा। मैंने हाँ कर दी। वो चाय बनाने गई। मैं उसके पीछे किचन में गया। उसकी साड़ी की पल्लू खिसक गई थी और उसके गहरे गोरे स्तन ब्लाउज से बाहर आने को बेताब थे। मैंने हिम्मत करके कहा, “देवासी, तुम्हारा भजन तो बहुत अच्छा था, लेकिन तुम्हारा शरीर और भी ज्यादा सुंदर है।” वो मुस्कुराई और बोली, “अर्जुन, तुम भी तो बहुत दिनों से मुझे घूर रहे हो। आज तो मौका मिल गया।”
उसने चाय का कप रखा और मेरी तरफ बढ़ी। मैंने उसे दीवार से चिपका लिया। उसके होठों पर अपना मुंह मार दिया। चुम्बन शुरू हुआ। उसकी जुबान मेरी जुबान से लड़ रही थी। मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले। दो भारी स्तन बाहर निकल आए। काले-काले निप्पल्स खड़े हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। देवासी सिसकारियाँ ले रही थी, “आह्ह्ह… अर्जुन, चूसो जोर से… मेरे स्तन तुम्हारे हैं आज…”
मैंने दूसरा स्तन भी चूसा। फिर नीचे झुका और उसकी साड़ी उठा दी। अंदर कोई पैंटी नहीं थी। उसकी चूत पूरी गीली थी। बालों वाली मोटी चूत, होंठ मोटे और लाल, बीच में चमकता हुआ रस। मैंने उंगली डाली। अंदर गर्म और गीला। “देवासी, तुम्हारी चूत कितनी गीली है…” मैं बोला। वो बोली, “तुम्हारे लंड की वजह से… निकालो अपना लंड, मुझे दिखाओ।”
मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड 7 इंच का खड़ा हो चुका था, नसें फूल रही थीं, सिरा लाल और चमकदार। देवासी ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। “कितना मोटा है… आज मेरी चूत फाड़ दोगे…” उसने घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को मुंह में लिया। उसकी जीभ लंड के नीचे घूम रही थी। वो चूस रही थी, “चुप चुप…” आवाज आ रही थी। मैं उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में ठोकने लगा।
फिर मैंने उसे उठाया और सोफे पर लिटा दिया। साड़ी पूरी उतार दी। अब वो पूरी नंगी थी। मैंने उसकी जांघें फैलाईं और मुंह उसके चूत पर लगा दिया। जीभ से चूत चाटने लगा। उसका रस मीठा और खारा था। मैंने क्लिटोरिस को चूसा। देवासी चीख रही थी, “आह्ह्ह… अर्जुन, चाटो… मेरी चूत खा लो… और गहराई से…” मैंने दो उंगलियां अंदर डाल दीं और ऊपर नीचे करने लगा। उसकी चूत फूल रही थी।
“अब लंड डालो… फाड़ दो मेरी चूत…” वो बोली। मैं उसके ऊपर चढ़ गया। लंड को चूत के मुंह पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड अंदर घुस गया। देवासी चीख पड़ी, “उफ्फ्फ… मोटा है… धीरे…” लेकिन मैंने और जोर से धक्का मारा। पूरा लंड अंदर। उसकी चूत मेरे लंड को निगल रही थी। मैं तेजी से चोदने लगा। “थप थप” की आवाज आ रही थी। उसके स्तन ऊपर नीचे उछल रहे थे।
मैंने उसे उल्टा कर दिया। अब डोगी स्टाइल में। उसकी गोल गोल गोल चूतड़ मेरे सामने थे। मैंने लंड पीछे से डाला। एक हाथ से उसके बाल पकड़े और जोर जोर से चोदने लगा। “देवासी, तेरी चूत कितनी टाइट है… आज फाड़ दूंगा…” वो बोली, “हाँ चोदो… मेरी चूत तुम्हारी… और जोर से…” मैंने उसकी गोल चूतड़ पर थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए।
फिर मैंने उसे उठाया और दीवार से टिका दिया। एक पैर उठाकर लंड अंदर डाला। इस पोजीशन में और गहराई तक जा रहा था। देवासी चूम रही थी मुझे। “अर्जुन, तुम बहुत अच्छा चोदते हो… मेरा पति तो कभी ऐसे नहीं चोदता…”
हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। मैंने उसे बेडरूम में ले जाकर फिर चोदा। इस बार साइड में लेटकर। लंड अंदर बाहर हो रहा था। उसकी चूत का रस मेरे लंड पर चमक रहा था। “रस निकाल दो… मेरी चूत में…” वो बोली। मैं तेजी से चोदता रहा। आखिरकार मैं चिल्लाया, “देवासी… आ रहा है…” और गरम गरम वीर्य उसकी चूत में भर दिया। वो भी झड़ गई। उसकी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी।
हम दोनों थककर लेट गए। लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई थी। दोबारा शुरू हुआ। इस बार वो ऊपर चढ़ी। मेरे लंड पर बैठकर ऊपर नीचे होने लगी। उसके स्तन मेरे मुंह के पास थे। मैं चूसता रहा और वो चोदती रही। पूरी रात हमने चोदा। सुबह होते होते हम दोनों थक चुके थे।
देवासी ने कहा, “अर्जुन, ये हमारा राज रहेगा। रोज शाम भजन के बाद तुम आना।” मैंने हाँ कर दी। तब से हर शाम देवासी भजन गाती है और उसके बाद हमारी चुदाई का सिलसिला शुरू होता है। उसकी चूत, मेरे लंड, उसके स्तन, सब कुछ अब मेरा है।
(कहानी जारी… लेकिन यहीं खत्म करते हैं क्योंकि रात की चुदाई की सारी डिटेल्स एक बार में नहीं बता सकता। देवासी की चूत अब भी मेरे ख्याल में गीली है।)