नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नक्ष है। मैं दिल्ली में रहता हूँ, एक छोटे से फ्लैट में। उम्र मेरी 28 साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। आज मैं आपको अपनी असली कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो मेरी जिंदगी का सबसे हॉट और गंदा एपिसोड है। ये कहानी है मेरी और केर्ति की। केर्ति मेरी ऑफिस की सहकर्मी है, उम्र 26 साल, शादीशुदा लेकिन पति अक्सर बाहर रहता है। उसकी बॉडी देखकर कोई भी लड़का अपना कंट्रोल खो दे। उसकी बड़ी-बड़ी गोल मम्मे, पतली कमर, और गोल-गोल गोल्फ जैसी गांड। उसकी चूत की खुशबू अभी भी मेरे नाक में है।
ये सब शुरू हुआ पिछले साल की मॉनसून में। ऑफिस में हम दोनों को एक प्रोजेक्ट पर साथ काम करना पड़ा। पहले तो बस नॉर्मल बातें होती थीं, लेकिन धीरे-धीरे केर्ति मेरे साथ फ्लर्ट करने लगी। एक दिन ऑफिस के बाद बारिश में हम दोनों स्कूटर पर वापस जा रहे थे। केर्ति मेरे पीछे बैठी थी, उसकी मोटी जांघें मेरी कमर से सट रही थीं। बारिश में उसकी साड़ी भीग गई थी और उसके मम्मों के निप्पल साफ दिख रहे थे। मैंने महसूस किया कि उसकी सांसें तेज हो रही हैं।
फ्लैट पहुंचकर मैंने उसे चाय पीने को कहा। अंदर आते ही केर्ति ने मुझे घूरा और बोली, “नक्ष, आज तो बारिश ने सब कुछ गीला कर दिया।” मैं समझ गया कि वो इशारा कर रही है। मैंने उसके करीब जाकर उसकी कमर पकड़ ली। केर्ति ने आंखें बंद कर लीं। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और जोर से चूमने लगा। उसकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई। हम दोनों की सांसें तेज हो गईं।
मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा। उसके मम्मे ब्रा के अंदर उभरे हुए थे। मैंने ब्रा का हुक खोला और उसके नंगे मम्मे बाहर निकाल लिए। कितने बड़े और मुलायम थे वो! निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक मम्मा मुंह में लिया और चूसने लगा। केर्ति चीख पड़ी, “आह्ह्ह नक्ष… चूसो मेरे मम्मे… जोर से चूसो!” मैं दूसरे मम्मे को हाथ से दबा रहा था। उसकी सांसें और तेज हो गईं।
फिर मैंने उसकी पेटीकोट का नाड़ा खोला। अंदर से उसकी चूत पूरी तरह गीली थी। बाल कटे हुए थे, गुलाबी रंग की चूत के होठ फूल चुके थे। मैंने उंगली डाली तो केर्ति कांप उठी। “नक्ष, मेरी चूत देख… कितनी प्यासी है तेरे लंड की!” मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड 7 इंच का खड़ा हो चुका था, मोटा और नसों से भरा। केर्ति ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। “कितना बड़ा है तेरा लंड… मेरी चूत फाड़ देगा!”
वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरे लंड को मुंह में ले लिया। उसकी गर्म सांसों ने मुझे और उत्तेजित कर दिया। वो जोर-जोर से चूस रही थी, जीभ से लंड के सिरे को चाट रही थी। लार टपक रही थी। मैं उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में लंड ठेल रहा था। “केर्ति, तेरी चूत चाटूं?” मैंने पूछा। वो बोली, “हां नक्ष, मेरी चूत चाटो… रस पी लो!”
मैंने उसे बेड पर लिटाया। उसकी टांगें फैलाईं और मुंह उसके चूत पर लगा दिया। चूत से मीठा-खट्टा रस निकल रहा था। मैंने जीभ से चूत के होठ चाटे, फिर क्लिटोरिस को चूसने लगा। केर्ति चीख रही थी, “आह्ह्ह… नक्ष… तेरी जीभ मेरी चूत में… और गहरी डाल… मैं झड़ने वाली हूं!” थोड़ी देर में उसका शरीर कांपने लगा और उसने मेरे मुंह पर अपना रस छोड़ दिया।
अब बारी थी चोदने की। मैंने केर्ति को घुटनों के बल करवाया, गांड ऊपर उठाई। उसकी गांड के छेद को देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने लंड पर थूक लगाया और चूत में घुसा दिया। “आह्ह्ह… नक्ष… धीरे… मेरा फट जाएगा!” लेकिन मैंने जोर से धक्का मारा। लंड आधा अंदर चला गया। केर्ति की चीख निकली। मैंने और जोर लगाया। पूरा लंड उसकी चूत में समा गया।
अब मैं जोर-जोर से चोदने लगा। “थप-थप” की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। केर्ति बोल रही थी, “नक्ष… मेरी चूत फाड़ दो… तेरे लंड से भर दो… गांड भी मारो!” मैंने उसकी गांड के छेद में उंगली डाली। केर्ति और उत्तेजित हो गई। मैंने लंड बाहर निकाला और सीधा गांड में घुसा दिया। “नहीं नक्ष… गांड फट जाएगी!” लेकिन वो खुद पीछे धक्का दे रही थी। गांड भी गीली हो चुकी थी। लंड आधा अंदर गया।
हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। मैंने केर्ति को पीठ के बल लिटाया, टांगें कंधों पर रखीं और फिर चूत में लंड घुसा दिया। इस बार और गहराई से। केर्ति के मम्मे उछल रहे थे। मैं उनको हाथों से दबा रहा था। “केर्ति, तेरी चूत कितनी टाइट है… लंड चूस रही है!” वो बोली, “हां नक्ष… चोद मुझे… पूरी रात चोद!”
हमने तीन बार पोजीशन बदली। डॉगी स्टाइल में गांड मारते हुए, फिर वो ऊपर बैठकर चूत में लंड लेकर ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी चूत से रस टपक रहा था। आखिर में मैंने केर्ति को लिटाया और तेजी से चोदा। “केर्ति… मैं झड़ने वाला हूं!” वो बोली, “अंदर ही छोड़ दे… मेरी चूत भर दे!” मैंने जोर से धक्का मारा और गरम-गरम माल उसकी चूत में भर दिया। केर्ति भी झड़ गई।
हम दोनों थककर गिर पड़े। लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई थी। केर्ति ने मेरे लंड को फिर से मुंह में लिया, साफ किया और फिर से खड़ा कर दिया। इस बार हमने बाथरूम में चुदाई की। पानी के नीचे केर्ति की गांड मारते हुए मैंने फिर से उसकी चूत भरी।
दोस्तों, ये एपिसोड कई महीनों तक चला। ऑफिस के बाद, कभी होटल में, कभी मेरे फ्लैट में। केर्ति की चूत हमेशा मेरे लंड के लिए तैयार रहती थी। वो बोलती, “नक्ष, तेरे बिना मेरी चूत सूख जाती है।” मैं भी उसकी मोटी गांड और बड़े मम्मों का दीवाना हो गया था।
हर बार चुदाई में नई-नई बातें होतीं। एक बार केर्ति ने लिंग पर चॉकलेट लगाकर चूसने लगी। दूसरी बार हमने किचन में चोदा, जहां वो खाना बना रही थी। उसकी साड़ी उठाकर पीछे से चोदा। रस बहता रहा।
ये कहानी अभी भी जारी है। केर्ति आज भी कभी-कभी आती है और हम पूरी रात चोदते रहते हैं। उसकी चूत का रस, उसके मम्मों की गर्माहट, गांड की टाइटनेस… सब कुछ याद रहता है।
दोस्तों, अगर आपको ये कहानी पसंद आई तो कमेंट में बताना। लेकिन याद रखना, केर्ति की चूत सिर्फ मेरे लंड के लिए है।
(शब्द गणना: 2150)