नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नक्ष है। मैं दिल्ली में एक छोटे से फ्लैट में रहता हूँ और जॉब करता हूँ। मेरी उम्र 28 साल है और मैं हमेशा से ही सेक्स की भूखा रहा हूँ। आज मैं आपको अपनी असली कहानी सुनाता हूँ जो मेरी पड़ोसी किर्ति के साथ हुई। किर्ति 32 साल की है, शादीशुदा लेकिन पति बाहर रहता है। उसकी बॉडी देखकर कोई भी आदमी दीवाना हो जाए। उसके बड़े-बड़े स्तन, मोटी गोल गांड और चिकनी चूत का ख्याल आते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है।
एक शाम बारिश हो रही थी। मैं घर आया तो किर्ति ने मुझे बुलाया। “नक्ष भाई, अंदर आओ ना, अकेली बोर हो रही हूँ।” मैं उसके फ्लैट में गया। वह साड़ी में थी, ब्लाउज थोड़ा खुला था जिससे उसकी सफेद चोली दिख रही थी। बातें करते-करते वो मेरे पास बैठ गई। उसकी सांसों की गर्माहट मेरे चेहरे पर पड़ रही थी। “नक्ष, तुम्हारा शरीर तो बहुत अच्छा है,” वो बोली और मेरे हाथ पर हाथ रख दिया।
मैंने हिम्मत करके उसे खींच लिया और उसके होंठों पर अपना मुंह लगा दिया। वो भी जोर से चूमने लगी। हमारी जीभें आपस में उलझ गईं। मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले और उसके भारी स्तन बाहर निकाल लिए। वे इतने बड़े थे कि दोनों हाथों में नहीं समा रहे थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। “आह्ह्ह नक्ष… चूसो जोर से… मेरे स्तन तुम्हारे हैं,” किर्ति चीखी। मैंने दूसरे स्तन को हाथ से दबाया और निप्पल को काट लिया। वो सिसकने लगी।
फिर मैंने उसकी साड़ी उठाई और पेटीकोट नीचे किया। उसकी चूत पूरी तरह गीली थी। बाल कटे हुए थे और चूत के होठ फूल गए थे। मैंने उंगली डाली तो वो चीख पड़ी, “हां नक्ष… उंगली डालो… मेरी चूत को फाड़ दो।” मैं दो उंगलियां अंदर-बाहर करने लगा। उसका रस बह रहा था। मैंने अपनी उंगलियां चाटीं – स्वाद नमकीन और मीठा था।
अब मैंने अपना लंड निकाला। वो 8 इंच का मोटा लंड था, नसें उभरी हुई। किर्ति ने उसे हाथ में लिया और बोली, “वाह, कितना बड़ा लंड है। आज मेरी चूत फट जाएगी।” वो घुटनों पर बैठ गई और लंड मुंह में ले लिया। वो जोर-जोर से चूसने लगी। “चलो किर्ति, पूरा लंड गले तक ले लो,” मैंने कहा। उसकी जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी, अंडकोष चाट रही थी। थूक से मेरा लंड चमक रहा था।
मैंने उसे उठाया और सोफे पर लिटा दिया। उसके पैर फैलाए और लंड चूत के मुंह पर रखा। एक जोरदार झटका मारा तो आधा लंड अंदर चला गया। “आह्ह्ह मर गई… इतना मोटा… धीरे नक्ष,” वो चीखी। लेकिन मैंने रुकना नहीं, जोर-जोर से धक्के मारने लगा। “ले ले मेरी रंडी, आज तेरी चूत फाड़ दूंगा,” मैं गंदी बातें बोलता रहा। उसकी चूत का रस मेरे लंड पर बह रहा था। हर धक्के पर “प्लच प्लच” की आवाज आ रही थी।
मैंने उसे उल्टा कर दिया। अब गांड ऊपर थी। मैंने गांड के छेद पर थूक लगाया और लंड घुसा दिया। “नहीं नक्ष… गांड मत मार… दर्द होगा,” वो बोली लेकिन मैंने नहीं सुना। आधा लंड गांड में घुसा तो वो चीखने लगी। मैं धीरे-धीरे फिर तेजी से चोदने लगा। उसकी गांड लाल हो गई थी। मैंने उसके बाल खींचे और बोला, “कहो किर्ति, कौन चोद रहा है तेरी गांड?” “तुम नक्ष… तुम चोदो… मैं तुम्हारी रंडी हूं,” वो चीखी।
हम घंटों चोदते रहे। सोफे पर, फर्श पर, दीवार से टिकाकर। मैंने उसके स्तनों को निचोड़ा, चूत चाटी, गांड चाटी। उसने भी मेरे लंड को चूसा, अंडकोष चाटे। आखिर में मैंने उसके मुंह में झड़ने लगा। “पी ले सारा माल,” मैंने कहा। वो सब पी गई और फिर मुस्कुराई।
रात भर हम चोदते रहे। सुबह तक किर्ति की चूत और गांड दोनों फूल गई थीं। वो बोली, “नक्ष, अब रोज आना।” ये थी हमारी पहली मुलाकात की कहानी। उसके बाद कई एपिसोड हुए जहां हम और भी गंदी चुदाई करते रहे – किचन में, बाथरूम में, छत पर। किर्ति की भूख कभी नहीं मिटती।
(यह कहानी जारी है… नक्ष और किर्ति के अगले एपिसोड में और भी ज्यादा गंदी बातें और लंबी चुदाई होगी।)