नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नितिन है। मैं मुंबई में रहता हूँ और स्टार प्लस के शोज देखना मेरा शौक है। खासकर ये रिश्ता क्या कहलाता है सीरियल में अक्षरा और नैतिक का जोड़ा मुझे बहुत पसंद आता था। अक्षरा की वो नरम गोरी त्वचा, उसके बड़े-बड़े स्तन और नैतिक की मजबूत कद-काठी देखकर मन में गंदे ख्याल आते थे। एक दिन मेरी जिंदगी में असली मौका आ गया जब मैं एक इवेंट में अक्षरा से मिला। वो असली जिंदगी में भी वैसी ही थी – पतली कमर, मोटी गोल गांड और मोटे होंठ। हमारी बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे वो मेरे फ्लैट में आने लगी।
पहली बार जब वो आई तो बारिश हो रही थी। अक्षरा ने गीले कपड़े पहने हुए थे। मैंने दरवाजा खोला और उसे अंदर बुलाया। “नितिन, बारिश में फंस गई,” वो बोली। मैंने उसे टॉवल दिया और कहा, “अक्षरा, तुम्हारे कपड़े बदल लो वरना बीमार पड़ जाओगी।” वो बाथरूम में गई और जब निकली तो सिर्फ मेरी टी-शर्ट पहने थी। टी-शर्ट उसके स्तनों को ढक नहीं पा रही थी। उसके निप्पल साफ दिख रहे थे। मैंने उसे देखा और मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।
“नितिन, तुम मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो?” अक्षरा ने पूछा। मैंने सीधा जवाब दिया, “तुम्हारी ये मोटी छातियां और ये गोल गांड देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया है।” वो शरमा गई लेकिन हंस पड़ी। “नैतिक तो कभी ऐसे नहीं बोलता।” मैंने उसे करीब खींचा और उसके होंठों पर चूम लिया। हमारा किस गहरा हो गया। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई और वो भी चूसने लगी। मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर उठाई और उसके स्तनों को नंगे कर दिया। दोनों स्तन बड़े और भरे हुए थे, निप्पल गुलाबी और खड़े। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। अक्षरा सिसकने लगी, “आह्ह्ह नितिन, चूसो और जोर से, मेरी छातियां तुम्हारे लिए हैं।”
मैंने दूसरा स्तन भी चूसा और उसके नीचे हाथ फेरा। उसकी कमर नरम थी। मैंने उसकी गांड पर हाथ मारा। “थप्प” की आवाज आई। “ये गांड कितनी मोटी है अक्षरा, नैतिक को पता है कि तू मेरे साथ चुदने आई है?” वो सांस लेते हुए बोली, “नहीं, लेकिन आज मैं सब कुछ करना चाहती हूँ।” मैंने उसे बेड पर लिटाया। उसकी टी-शर्ट पूरी उतार दी। अब वो सिर्फ पैंटी में थी। पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने उसे उतारा और उसकी चूत देखी। बाल कटे हुए, होंठ मोटे और रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली। अक्षरा चीख पड़ी, “उंगली मत डालो, सीधा लंड डालो।”
मैंने अपना लंड निकाला। सात इंच का मोटा लंड, नसें उभरी हुई, सिरा लाल। अक्षरा ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। “कितना बड़ा है, नैतिक का छोटा है।” मैंने उसके मुंह में डाल दिया। वो चूसने लगी। “चूस अक्षरा, पूरा मुंह में ले, मेरे लंड का स्वाद ले।” उसकी जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी। लार टपक रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर गला तक धकेला। वो खांसने लगी लेकिन रुक नहीं रही थी।
फिर मैंने उसे पलटकर चारों हाथों पर कर दिया। उसकी गांड ऊपर उठी। मैंने चूत के पास मुंह लगाया और चाटने लगा। “आह्ह्ह नितिन, चाटो मेरी गीली चूत, रस पी लो।” उसका रस मीठा था। मैंने जीभ अंदर डाली। अक्षरा कांप रही थी। “चोदो मुझे, अब और मत तड़पाओ।” मैंने लंड चूत पर रखा और एक जोरदार झटका मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। अक्षरा चीखी, “मर गई, इतना मोटा, धीरे से।” लेकिन मैंने नहीं सुनी। दो झटकों में पूरा लंड अंदर था। चूत कसी हुई थी। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। “थप थप” की आवाज भर रही थी।
“अक्षरा तेरी चूत कितनी टाइट है, नैतिक कभी ऐसे नहीं चोदता होगा।” वो बोल रही थी, “नहीं चोदता, आज तू मुझे अपनी रखैल बना ले।” मैंने रफ्तार बढ़ाई। उसके स्तन लटक रहे थे। मैंने उन्हें पकड़कर निचोड़ा। पसीना बह रहा था। बीस मिनट तक उसी पोजीशन में चोदा। फिर अक्षरा ने कहा, “अब गांड मारो।” मैंने लंड निकाला। चूत का रस लंड पर चिपका था। मैंने थूक लगाया गांड पर और धीरे से लंड घुसाया। गांड भी टाइट थी। अक्षरा चीख रही थी, “दर्द हो रहा, लेकिन मजा भी आ रहा।”
मैंने गांड मारना शुरू किया। दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारे। “ले अक्षरा, ले मेरा लंड अपनी गांड में।” वो बोल रही थी, “हां मारो, गांड फाड़ दो।” हम दोनों पसीने से तर हो गए थे। आखिर में मैंने लंड निकाला और उसके स्तनों पर झड़ गया। गर्म-गर्म माल उसके स्तनों पर फैल गया। अक्षरा ने उसे उंगलियों से फैलाया और चाट लिया।
ये हमारी पहली चुदाई थी। उसके बाद हफ्ते में तीन-चार बार मिलते। ऑफिस के बाद, कभी होटल में, कभी मेरे फ्लैट में। हर बार नई पोजीशन। कभी वो ऊपर चढ़कर चुदती, कभी मैं पीछे से। उसकी चूत हमेशा गीली रहती। एक बार हम मॉनसून में बालकनी में चोदे। बारिश गिर रही थी और हम नंगे खड़े थे। मैंने उसे दीवार से लगाकर चोदा। लोग नीचे देख रहे थे लेकिन हमें फर्क नहीं पड़ता था।
अक्षरा ने बताया कि नैतिक से उसकी शादी में मजा नहीं आता। “वो सिर्फ दो मिनट में झड़ जाता है। तू घंटों चोदता है।” मैंने उसे और गंदी बातें सिखाई। “बोल अक्षरा, बोल कि तू मेरी चूत है।” वो बोलती, “हां नितिन, मैं तेरी चूत हूं, तेरी गांड हूं, तू मुझे जब चाहे चोद ले।”
एक बार हमने तीन घंटे तक चोदा। पहले मुंह से, फिर चूत से, फिर गांड से। अक्षरा थक गई लेकिन रुक नहीं रही थी। “एक बार और, लंड डाल।” आखिर में दोनों एक साथ झड़े। उसकी चूत से रस निकल रहा था।
ये कहानी सच है दोस्तों। अक्षरा नितिक स्टार प्लस वाली नहीं, असली अक्षरा है जो अब मेरी रखैल बन चुकी है। अगर तुम्हें भी ऐसी कहानी चाहिए तो बताना। लेकिन याद रखना, ये सब 18+ है और सिर्फ फैंटेसी नहीं, असली मजा है।