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सुझाव: Bihari Sex Dehati Chudai – Gaon Ki Jawaan Ladki Ke Saath — देखने योग्य

सुझाव: Bihari Sex Dehati Chudai – Gaon Ki Jawaan Ladki Ke Saath — देखने योग्य

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम रामेश्वर है। मैं बिहार के एक छोटे से देहाती गांव का रहने वाला हूं, जहां खेतों के बीच छोटी-छोटी मिट्टी की दीवारों वाली झोपड़ियां हैं और शाम को बिजली की जगह लालटेन जलती है। उम्र मेरी पैंतीस साल है और शरीर मजबूत है, काले रंग का, चौड़ी छाती और हाथों में मेहनत के निशान। आज मैं आपको अपनी एक सच्ची और बेहद गंदी चुदाई की कहानी सुनाता हूं, जो मेरी गांव की पड़ोस वाली लड़की राधा के साथ हुई। राधा उम्र में बाईस साल की थी, गोरी नहीं लेकिन देहाती रंगत वाली, मोटी-मोटी जांघें, भारी-भारी स्तन जो ब्लाउज में फटते लगते थे, और गोल-गोल गांड जो चलते समय लहराती थी।

वो मेरे खेत के पास वाली झोपड़ी में रहती थी। उसके पति शहर में मजदूरी करने गए थे और वो अकेली रहती थी। एक दिन बारिश में मैं उसके घर गया पानी का पंप ठीक करने। अंदर घुसते ही देखा राधा सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी, ब्लाउज का हुक खुला था और उसके मोटे स्तन आधे बाहर निकले हुए थे। उसकी चूत की खुशबू हवा में फैल रही थी। मैंने पूछा, “राधा, पंप ठीक कर दूं?” वो मुस्कुराई और बोली, “रामेश्वर भैया, अंदर आ जाओ, बारिश में भीग जाओगे।”

हम दोनों अंदर बैठे। बातों में बात बढ़ी। उसने बताया कि पति महीनों से नहीं आया, उसकी चूत सूखी पड़ी है। मैंने सीधा कहा, “राधा, तेरी चूत की प्यास बुझा दूं?” वो शर्मा गई लेकिन आंखों में चमक थी। उसने मेरा हाथ पकड़कर अपने स्तनों पर रख दिया। ब्लाउज के अंदर उसके काले-काले निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने ब्लाउज फाड़ते हुए उसके एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। वो चीख पड़ी, “आह्ह्ह रामेश्वर, जोर से चूस, मेरे स्तन फट जाएंगे!”

मैंने उसका पेटीकोट ऊपर किया। उसकी चूत घनी काली जंगली झाड़ियों से ढकी थी, होंठ मोटे और लाल, अंदर से गुलाबी और गीली। मैंने उंगली डाली तो रस बह निकला। “राधा तेरी चूत कितनी गर्म है!” मैंने कहा। वो बोली, “अब और मत सताओ, अपना लंड निकालो और चोद दो!” मैंने अपनी लुंगी खोली। मेरा लंड दस इंच का काला, मोटा, नसों से भरा और लाल सिरा बाहर निकला हुआ था। राधा ने उसे हाथ में लिया और बोली, “वाह, कितना मोटा लंड है, आज मेरी चूत फट जाएगी!”

उसने घुटनों के बल बैठकर मेरा लंड मुंह में लिया। जीभ से सिरे को चाटते हुए पूरा गले तक ले गई। “उम्म्म्म, स्वाद कितना तीखा है!” वो चूस रही थी और मैं उसके बाल पकड़कर मुंह चोद रहा था। थूक और लार उसके स्तनों पर गिर रही थी। फिर मैंने उसे उल्टा लिटाया, गांड ऊपर करके। उसकी गांड की दरार में जीभ डाली और चाटने लगा। “आह्ह्ह, रामेश्वर, मेरी गांड चाटो, चूत भी चाटो!” वो चीख रही थी।

अब मैंने लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा और एक जोर का धक्का मारा। “हांआआआ!” राधा चीख उठी। मेरा पूरा लंड उसकी गर्म, गीली चूत में घुस गया। चूत का रस बाहर निकलकर मेरी जांघों पर बह रहा था। मैं जोर-जोर से चोदने लगा। “थप थप थप” की आवाजें झोपड़ी में गूंज रही थीं। उसके स्तन मेरे हाथों में लटक रहे थे, मैं निप्पल खींच रहा था। “राधा तेरी चूत कितनी टाइट है, आज फाड़ दूंगा!”

हम पोजीशन बदलते रहे। पहले कुत्ते वाली, फिर वो मेरे ऊपर बैठी और अपनी चूत में लंड घुसाकर उछलने लगी। उसके मोटे स्तन उछल रहे थे, पसीने से भीग गए थे। “आह्ह्ह, लंड और अंदर डाल, मेरी चूत फट रही है!” वो चीख रही थी। मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारे, लाल निशान पड़ गए। फिर मैंने उसे दीवार से टिका कर खड़ा करके पीछे से चोदा। लंड की हर धक्के में उसकी चूत का रस छिटक रहा था।

हम घंटों चोदते रहे। उसकी चूत बार-बार झड़ रही थी, मेरे लंड पर सफेद रस की परत जम गई। आखिर में मैंने लंड निकालकर उसके मुंह में डाला और गरम-गरम वीर्य उसके गले में उतार दिया। वो सब पी गई और बोली, “रामेश्वर, अब रोज चोदना मुझे!”

इसके बाद कई रातें हमारी चुदाई की। कभी खेत में, कभी उसके आंगन में, कभी बारिश में नंगे होकर। उसकी चूत, गांड, मुंह सब मेरे लंड का गुलाम हो गया। देहाती चुदाई की वो मस्ती आज भी याद आती है।

(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि आगे भी हमारी चुदाई चलती रही, लेकिन इतना ही सुनाता हूं दोस्तों।)

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