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चुनिंदा: Desi Kattey Albeliya Ki Rasili Chudai Kahani — संपादकीय चयन

चुनिंदा: Desi Kattey Albeliya Ki Rasili Chudai Kahani — संपादकीय चयन

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं जयपुर के पास एक छोटे से कस्बे में रहता हूँ। उम्र मेरी पैंतीस साल है और मैं एक छोटी सी ट्रांसपोर्ट कंपनी चलाता हूँ। जिंदगी में बहुत कुछ देखा, लेकिन जो किस्सा आज मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ वो मेरी जिंदगी का सबसे गंदा, सबसे गर्म और सबसे यादगार वाकया है। सब कुछ शुरू हुआ मेरी एक पुरानी दोस्त की शादी से। शादी छोटे से गाँव में थी, जहाँ बिजली आती-जाती रहती थी और रात में ठंडी हवा चलती थी। वहाँ मैं पहली बार मिला उससे—देसी कट्टेय अलबेलिया से। लोग उसे प्यार से अलबेलिया कहते थे, लेकिन गाँव वाले कहते थे कट्टेय अलबेलिया क्योंकि उसकी कमर कट्टेय जैसी तनी हुई थी और चाल में वो अलबेली अंदाज रखती थी। नाम था उसका मीरा, लेकिन सब उसे कट्टेय अलबेलिया ही पुकारते थे।

मीरा की उम्र सत्ताईस साल थी। गाँव की शादी में वो लाल रंग की साड़ी में आई थी। साड़ी इतनी पतली थी कि उसके मोटे-मोटे स्तन साफ दिख रहे थे। निप्पल्स के आसपास का काला घेरा हल्का सा उभरा हुआ था। उसकी कमर पतली थी लेकिन नितंब बहुत भारी और गोल थे। जब वो चलती तो उसकी गाँड़ हिलती थी जैसे दो बड़े-बड़े फल लटक रहे हों। उसके होंठ मोटे थे, आँखें काजल लगाई हुई, और बाल खुले छोड़े हुए। पहली नजर में ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने सोचा, ये तो देसी कट्टेय अलबेलिया है, जिसकी चूत में आज रस भरना है।

शादी के बाद बारात वाले घर में सब सो गए। मैं बाहर बरामदे में लेटा था। अचानक मीरा आई। उसने फुसफुसाकर कहा, “राहुल भाई, अकेले क्यों सो रहे हो? अंदर आओ ना, ठंड लग रही है।” उसकी आवाज में वो अलबेलापन था। मैं उठा और उसके पीछे उसके कमरे में गया। कमरा छोटा था, एक चारपाई, एक टिमटिमाती हुई लालटेन। मीरा ने दरवाजा बंद किया और बोली, “राहुल, मैं तुम्हें बहुत दिनों से देख रही हूँ। तुम्हारी नजरें मेरी छाती पर ही टिकी रहती हैं। आज चोरी-छुपे कुछ कर लेते हैं।”

उसने साड़ी का पल्लू गिरा दिया। उसके दोनों स्तन बाहर आ गए। बड़े-बड़े, गोरे, नीचे की तरफ थोड़े झुके हुए लेकिन निप्पल्स सख्त खड़े। मैंने तुरंत हाथ बढ़ाया और एक स्तन को जोर से दबाया। “अरे वाह, कितने मुलायम हैं तेरे स्तन कट्टेय अलबेलिया,” मैंने कहा। वो हँसी और बोली, “दबा, और जोर से दबा। चूस भी ले।” मैंने मुंह लगाया और निप्पल को चूसने लगा। उसका स्वाद नमकीन-मीठा था। वो सिसकारियाँ लेने लगी, “आह्ह्ह… राहुल, चूस, मेरी चूत गीली हो रही है।”

मैंने उसकी साड़ी खींची और पेटीकोट का नाड़ा खोला। वो पूरी नंगी हो गई। उसकी चूत साफ शेव की हुई थी, लेकिन हल्का सा बाल ऊपर बचा हुआ था। चूत के होठ मोटे थे, बीच में गुलाबी दरार और ऊपर से रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली तो अंदर से गरम-गरम रस निकला। “तेरी चूत तो बिल्कुल देसी कट्टेय जैसी तंग है,” मैं बोला। वो बोली, “तो फिर अपना मोटा लंड अंदर डाल ना।”

मैंने अपना लंड निकाला। वो साढ़े सात इंच का मोटा लंड था, नसें उभरी हुई, सिरा लाल और चमकदार। मीरा ने तुरंत उसे मुंह में लिया। उसकी जीभ ने मेरे लंड के नीचे वाले हिस्से को चाटा, फिर पूरा मुँह में ठूस लिया। “गले तक ले, अलबेलिया,” मैंने कहा। वो गले तक ले गई और गले से आवाजें आने लगीं, “ग्लुक-ग्लुक।” लार उसके मुंह से निकलकर मेरे अंडों पर टपक रही थी।

फिर मैंने उसे चारपाई पर लिटाया। उसके पैर फैलाए और मुंह से उसकी चूत चाटने लगा। चूत का स्वाद खट्टा-मीठा था। मैंने जीभ से क्लिटोरिस को रगड़ा, फिर अंदर तक जीभ डाली। वो चीखने लगी, “आह्ह्ह… राहुल, चाट, मेरी चूत का सारा रस पी जा।” मैंने दो उंगलियाँ अंदर डालीं और तेजी से आंदोलन करने लगा। उसकी चूत से छलक-छलक रस निकल रहा था। वो झड़ने लगी, “मैं झड़ रही हूँ… आह्ह्ह!”

उसके बाद मैंने उसकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा। एक जोरदार झटका मारा तो आधा लंड अंदर घुस गया। “उफ्फ्फ… कितना मोटा है तेरा लंड!” वो चीखी। मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाला। उसकी चूत तंग थी, दीवारें मेरे लंड को कस रही थीं। मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। “थप-थप” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। उसकी गाँड़ नीचे से उठ-उठकर मेरे लंड को ले रही थी।

मैंने उसे उल्टा कर दिया। अब वो कुत्ते वाली मुद्रा में थी। मैंने पीछे से लंड डाला। उसकी गाँड़ के दोनों गोल हिस्से अलग हो गए और लंड और गहराई तक घुसा। मैंने उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोका। “ले, ले मेरी देसी कट्टेय अलबेलिया की चूत,” मैं गरजा। वो बोली, “हाँ, और जोर से चोद, मेरी चूत फाड़ दे।” मैंने उसके बाल खींचे और एक हाथ से उसके स्तन दबाए। पसीना दोनों के शरीर पर चमक रहा था।

लगभग बीस मिनट तक मैंने उसे चोदा। फिर वो फिर से झड़ गई। मैंने भी अपना गरम-गरम वीर्य उसकी चूत के अंदर छोड़ा। वीर्य इतना था कि चूत से बाहर निकलकर उसकी जाँघों पर बहने लगा।

लेकिन रात यहीं खत्म नहीं हुई। हम दोनों थके लेकिन लंड फिर खड़ा हो गया। इस बार मीरा ने खुद ऊपर बैठकर लंड लिया। वो ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें हाथों में लिया और चूसा। वो बोली, “राहुल, आज रात भर चोदना मुझे। मैं तेरी रंडी बन गई हूँ।”

हमने तीन बार और चोदा। हर बार ज्यादा गंदी बातें, ज्यादा जोरदार ठोके। आखिरी बार मैंने उसकी गाँड़ में उंगली डाली जबकि लंड चूत में था। वो पागल हो गई, “आह्ह्ह… दोनों छेद भर दे।” सुबह होने तक हम थक चुके थे। मीरा ने कहा, “राहुल, ये किस्सा सिर्फ हम दोनों का रहे। लेकिन जब भी मौका मिले, आना। तेरी देसी कट्टेय अलबेलिया तेरे लंड की भूखी है।”

उस रात के बाद मैं कई बार गाँव गया। हर बार नई-नई पोजीशन, नई-नई गंदी बातें। मीरा की चूत अब मेरे लंड की आदी हो गई थी। वो खुद फोन करके बुलाती, “आ जा, मेरी चूत सूख रही है।” हमने कार में, खेत में, और एक बार मंदिर के पीछे भी चोदा। हर बार उसकी तंग चूत, भारी गाँड़ और मोटे स्तन मुझे पागल करते।

दोस्तों, ये थी मेरी देसी कट्टेय अलबेलिया की कहानी। आज भी जब याद आती है तो लंड खड़ा हो जाता है। अगर तुम्हें भी कोई ऐसी अलबेलिया मिले तो कभी हाथ ना छोड़ना। चोदो उसे पूरी रात, उसका सारा रस पी लो।

(कहानी यहीं समाप्त नहीं होती, बल्कि आगे भी कई रातें ऐसी ही बीतीं। मीरा अब मेरी नियमित साथी है। जब भी जयपुर आती है, मेरे फ्लैट में रुकती है। वहाँ हम नंगे घूमते हैं, एक-दूसरे को चाटते हैं, और घंटों चोदते हैं। उसकी चूत अब मेरे वीर्य से भरी रहती है। कभी वो मेरे अंडों को चूसती है, कभी मैं उसकी गाँड़ चाटता हूँ। कभी वो मुझे कहती है, “राहुल, आज मेरी गाँड़ मार।” मैं उसके गाँड़ के छेद में लंड घुसाता हूँ। वो चीखती है लेकिन मजे से लेती है। रस निकलता है, पसीना बहता है, और हम दोनों चरम सुख पाते हैं। ये रिश्ता अब गहरा हो चुका है। देसी कट्टेय अलबेलिया मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा मसाला बन चुकी है।)

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