नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली से हूँ लेकिन पिछले साल छुट्टियों में अपने नाना के गाँव गया था, जो उत्तर प्रदेश के एक छोटे से मुस्लिम बहुल इलाके में है। गाँव छोटा था, चारों तरफ खेत, कच्ची सड़कें और शाम को मस्जिद की आवाजें। मैं बीस साल का हूँ, अच्छा कद, मोटा लंड जो देखकर औरतें घबरा जाती हैं। वहाँ एक लड़की थी, नाम था आयशा। उम्र उसकी बाईस साल, गाँव की सबसे खूबसूरत मुस्लिम लड़की। गोरी चमड़ी, बड़ी-बड़ी आँखें, मोटे होंठ, और शरीर ऐसा कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए। उसकी छाती पर ३६ साइज के मोटे-मोटे स्तन, कमर पतली, और पीछे से देखो तो गोल-गोल ३८ इंच की गांड जो चुदाई के लिए बनी हुई लगती थी।
मैं रोज खेतों के पास घूमता था। एक दिन आयशा अकेली पानी भरने जा रही थी। उसने सलवार-कमीज पहनी हुई थी, लेकिन कपड़े इतने पतले कि उसके स्तनों की नोकें साफ दिख रही थीं। मैंने बात शुरू की। पहले तो वो शर्मा गई, लेकिन जब मैंने उससे वीडियो बनाने की बात की – गाँव की लड़कियों के romance videos जैसी चीजें – तो उसकी आँखों में चमक आ गई। वो भी अकेली थी, पति विदेश में काम करता था। धीरे-धीरे हम दोस्त बन गए।
एक शाम बारिश शुरू हुई। हम दोनों उसके घर के पीछे खेत में छुप गए। आयशा ने कहा, “राहुल, ये सब गलत है, लेकिन मैं भी अकेली हूँ।” मैंने उसके हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया। वो चौंक गई। “कितना मोटा है तेरा लंड! मेरे पति का तो पतला सा है।” मैंने उसे चूम लिया। उसके होंठों पर चूसते हुए मैंने उसके स्तनों को दोनों हाथों से दबाया। “आयशा, तेरी गांड और छाती देखकर तो लंड फटने को है।”
हम जमीन पर लेट गए। बारिश में भीगते हुए मैंने उसकी सलवार उतारी। उसकी सफेद जांघें, और बीच में गुलाबी-सी रसीली चूत, बालों से थोड़ी ढकी हुई। मैंने उंगली डाली। “आह्ह… राहुल, धीरे… मेरी चूत बहुत सूखी है, तेरे लंड से तर कर दे।” मैंने अपनी उंगली चाटी, फिर उसके स्तन चूसने लगा। एक हाथ से उसके निप्पल को मरोड़ता, दूसरे हाथ से चूत में उंगली घुमाता। आयशा सिसकने लगी, “चोदो मुझे, लंड डालो मेरी चूत में।”
मैंने अपना लंड निकाला, सात इंच लंबा, मोटा, नसों से भरा। आयशा ने उसे हाथ में लिया और चूमने लगी। “कितना गर्म है, जैसे लोहा।” उसने मुँह में लिया, जीभ से चाटते हुए ऊपर-नीचे करने लगी। लार टपक रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुँह चोदना शुरू किया। “ले, मेरी रंडी, पूरा लंड गले तक ले।” वो घुट-घुट कर ले रही थी, आँखों से आँसू निकल रहे थे लेकिन मुँह से “उम्म्म… और…” निकल रहा था।
फिर मैंने उसे घुमाया, गांड ऊपर करके। उसकी गांड के छेद को चाटा, जीभ डाली। “राहुल, ये क्या कर रहे हो… शर्म आ रही है।” लेकिन वो अपनी गांड पीछे धकेल रही थी। मैंने लंड चूत पर रखा और एक जोरदार झटका मारा। “आह्ह्ह… फट गई मेरी चूत!” लंड आधा अंदर गया। उसकी चूत बहुत तंग थी, रस निकल रहा था। मैं धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। “ले, मेरी मुस्लिम चूत… गांव की रंडी… पूरा लंड ले।”
हम घंटों चोदते रहे। पहले मिशनरी में, फिर डॉगी स्टाइल में। हर बार वो चीखती, “जोर से चोद, मेरी गांड भी मार।” मैंने उसकी गांड में उंगली डाली, फिर लंड निकालकर गांड के छेद पर रखा। “नहीं… गांड में दर्द होगा।” लेकिन जब डाला तो वो पागल हो गई। “आह्ह… मर गई… लेकिन और डाल… तेरे लंड से मेरी गांड फट रही है।”
हमने कई पोजीशन आजमाई। वो मेरे ऊपर चढ़कर चोदने लगी, उसके स्तन उछल रहे थे। मैं नीचे से धक्के मारता, “तेरी चूत का रस मेरे लंड पर बह रहा है।” फिर हम ६९ में लगे, मैं उसकी चूत चूसता, वो मेरा लंड।
बारिश रुक गई तो हम थककर लेट गए। लेकिन रात को फिर मिले। आयशा ने कहा, “राहुल, ये romance videos बना लो, लेकिन गाँव में किसी को पता न चले।” हमने मोबाइल पर रिकॉर्ड किया – उसकी चूत में लंड जाता हुआ, रस निकलता हुआ, गांड थपथपाती हुई।
अगले दिनों हम खेतों में, खलिहान में, यहाँ तक कि मस्जिद के पीछे भी चोदते रहे। एक बार उसने बुरका पहना हुआ था, मैंने अंदर हाथ डालकर चूत सहलाई। “बुरका उठा के चोद रहा हूँ तेरी मुस्लिम चूत को।” वो पागल हो जाती थी।
हमारी चुदाई में वो कहती, “तेरा लंड मेरी चूत का राजा है। रोज चोदना मुझे।” मैं उसके स्तनों को चूसता, निप्पल काटता, चूत में उंगलियाँ घुमाता, फिर पूरा लंड घुसा देता। रस दोनों तरफ बहता, शरीर पसीने से तर।
आखिर में जब मैं वापस दिल्ली आया तो आयशा ने कहा, “वीडियो भेजना, रात को देखकर उंगली डालूंगी।” अब भी हम फोन पर बात करते हैं, गंदी बातें करते हैं। गाँव की वो मुस्लिम लड़की मेरी सबसे गंदी और प्यारी याद है।
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, दोस्तों। अगली मुलाकात में और भी लंबी चुदाई होगी, लेकिन अभी के लिए इतना ही।)