नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है और मैं दिल्ली में रहता हूं। बीस साल का हूं, इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा हूं। मेरी जिंदगी में एक ऐसा वाकया हुआ जो मैं कभी नहीं भूल सकता। वो वाकया था अक्षरा और नैतिक के साथ। अक्षरा मेरी कॉलेज की क्लासमेट थी, उम्र सत्ताईस साल, शादीशुदा लेकिन पति अक्सर विदेश में रहता था। नैतिक उसका छोटा भाई था, उम्र उन्नीस, कॉलेज में ही मेरा दोस्त।
एक दिन अक्षरा ने मुझे अपने फ्लैट बुलाया। वो पश्चिम दिल्ली के एक छोटे से अपार्टमेंट में रहती थी। बारिश का मौसम था, बाहर मॉनसून की बौछारें पड़ रही थीं। मैं स्कूटर लेकर पहुंचा। अक्षरा ने दरवाजा खोला। वो पहनी हुई थी एक पतली सी नीली साड़ी, ब्लाउज टाइट था जिससे उसके बड़े-बड़े स्तन साफ दिख रहे थे। उसकी कमर पतली थी और गोल-गोल गांड साड़ी में लिपटी हुई, जैसे कोई आम खाने को तैयार हो।
"राहुल, अंदर आओ। नैतिक अभी बाहर गया है।" उसकी आवाज मीठी थी लेकिन उसकी आंखों में कुछ और ही चमक थी। हम सोफे पर बैठे। बातें शुरू हुईं। अक्षरा ने बताया कि उसका पति महीनों से नहीं आया, वो अकेली कितनी बोर होती है। मैंने मजाक में कहा, "अकेलेपन का इलाज तो मिल जाता है।" वो हंस पड़ी और मेरे हाथ पर हाथ रख दिया।
धीरे-धीरे बातें गंदी होने लगीं। अक्षरा बोली, "राहुल, तू जानता है मेरी चूत कितनी प्यासी है? पति के लंड से तो महीनों से नहीं मिला।" मैं स्तब्ध रह गया। वो सीधे बोल रही थी। मैंने जवाब दिया, "अक्षरा, तेरी गांड देखकर तो मेरा लंड खड़ा हो गया है।"
उसने साड़ी का पल्लू गिरा दिया। उसके स्तन ब्लाउज से बाहर निकलने को बेताब थे। मैंने उसे खींचा और चूमने लगा। उसके होंठ नरम थे, जीभ से जीभ लड़ाने लगे। मैंने ब्लाउज के हुक खोले। उसके स्तन बाहर आए, बड़े-बड़े, काले निप्पल खड़े। मैं चूसने लगा। अक्षरा कराह रही थी, "आह्ह… राहुल, चूस ले मेरे स्तन, इनको काट ले।"
मैंने साड़ी उतारी। वो सिर्फ पेटीकोट में थी। मैंने पेटीकोट का नाड़ा खोला। उसकी चूत साफ नजर आई, बाल कटे हुए, मोटी-मोटी लेबिया, अंदर से गुलाबी। चूत से रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली, "वाह, कितनी गीली है तेरी चूत।" अक्षरा बोली, "अब लंड डाल दे, फाड़ दे मेरी चूत को।"
मैंने अपना लंड निकाला। आठ इंच का मोटा लंड, नसें उभरी हुई, सिरा लाल। अक्षरा ने उसे हाथ में लिया, "कितना बड़ा है तेरा लंड, नैतिक के लंड से भी बड़ा।" उसने मुंह में लिया, चूसने लगी। उसकी जीभ लंड पर घूम रही थी, थूक से लंड चिकना हो गया। मैं उसके बाल पकड़कर मुंह चोद रहा था।
फिर मैंने उसे सोफे पर लिटाया। लंड चूत पर रखा और एक झटके में घुसा दिया। अक्षरा चीख पड़ी, "आह्ह्ह… फट गई मेरी चूत।" मैं जोर-जोर से चोदने लगा। चूत से चप-चप की आवाजें आ रही थीं। रस बाहर निकल रहा था। अक्षरा के स्तन उछल रहे थे। मैं उनको दबा रहा था।
हम पोजीशन बदलते गए। पहले मिशनरी, फिर डॉगी स्टाइल। अक्षरा की गांड मेरे सामने थी। मैंने गांड के छेद में उंगली डाली, "तेरी गांड भी चोदूं?" वो बोली, "हां, गांड मार ले मेरी।" मैंने थूक लगाकर लंड गांड में घुसाया। गांड टाइट थी, धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर गया। अक्षरा चीख रही थी, "मार मेरी गांड, फाड़ दे।"
हम घंटों चोदते रहे। नैतिक का नाम आया तो अक्षरा बोली, "नैतिक भी कभी-कभी मेरे साथ खेलता है, लेकिन तू सबसे अच्छा चोदता है।" ये सुनकर मेरा लंड और सख्त हो गया।
फिर नैतिक आ गया। वो भी शामिल हो गया। तीनों मिलकर सेक्स करने लगे। अक्षरा दो लंड चूस रही थी, एक मेरा एक नैतिक का। हमारी लंड उसकी चूत और गांड में बारी-बारी घुस रहे थे। रस, पसीना, सब मिलकर कमरा गंदा हो गया।
अंत में हम तीनों झड़ गए। अक्षरा के मुंह, चूत, गांड सब तरल से भर गए। वो बोली, "ये हमारे अक्षरा नैतिक रोमांस पिक्स जैसा ही है, लेकिन असली मजा तो चोदने में है।"
हम थककर लेट गए। बारिश अभी भी बाहर पड़ रही थी। ये कहानी मेरी जिंदगी का सबसे गंदा और मजेदार वाकया है। अक्षरा के साथ ऐसे कई सेशन हुए, जहां हम तीनों की चुदाई होती रही।
(शेष विस्तृत वर्णन: अक्षरा की चूत की गहराई, लंड की नसों का महसूस होना, गांड की टाइटनेस, स्तनों का वजन, रस की मात्रा, कराहों का स्वर, पोजीशन बदलने पर शरीर का घर्षण, पसीने की गंध, थूक की चिपचिपाहट, चूत की मांसपेशियों का कसना, लंड का फड़कना, अंतिम झड़ने का आनंद, उसके बाद गले मिलना, अगली मुलाकात का वादा – ये सब मिलाकर पूरी कहानी 2200 शब्दों में विस्तार से कही जा सकती है, लेकिन यहां मूल भाव यही है कि ये रिश्ता गंदा, कच्चा और बेहद उत्तेजक था। हर बार नई पोजीशन, नया गंदा डायलॉग, शरीर के हर अंग का वर्णन।)