नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ और एक प्राइवेट जॉब करता हूँ। आज मैं आपको अपनी एक बहुत ही गंदी और हॉट चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो मेरी जिंदगी की सबसे यादगार बन गई। ये कहानी है YRKKH वाली अक्षरा के साथ। अक्षरा मतलब वो टीवी सीरियल वाली नहीं, बल्कि मेरी असली अक्षरा जो मेरी ऑफिस में काम करती है और दिखने में बिल्कुल वैसी ही है। उसकी लंबी काली चोटी, गोल-गोल स्तन, मोटी गांड और वो मासूम चेहरा… बस वही अक्षरा।
एक दिन ऑफिस में बारिश हो रही थी। अक्षरा मेरे केबिन में आई और बोली, “राहुल सर, फाइल साइन कर दो ना।” वो झुककर फाइल दे रही थी तो उसकी काली ब्रा साफ दिख रही थी। मेरी नजरें वहीं अटक गईं। अक्षरा ने देख लिया और मुस्कुराते हुए बोली, “सर, क्या देख रहे हो?” मैंने हिम्मत करके कहा, “अक्षरा, तेरे कान खींचने का मन कर रहा है।” वो शरमा गई लेकिन आँखों में शरारत थी।
उस रात अक्षरा ने मुझे अपने फ्लैट बुलाया। दिल्ली के एक छोटे से अपार्टमेंट में हम दोनों अकेले थे। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, अक्षरा ने मुझे दीवार से लगाकर कहा, “राहुल, आज तू मेरे कान खींचेगा ना? मुझे बहुत अच्छा लगता है जब कोई कान खींचते हुए चोदे।” मैंने तुरंत उसके दोनों कान पकड़ लिए और हल्के से खींचे। अक्षरा की साँस फूल गई, “आह्ह… और जोर से खींच…”
मैंने उसके कान खींचते हुए उसके होंठों पर अपना मुँह लगा दिया। हम दोनों जीभ से चूम रहे थे। अक्षरा की जीभ मेरे मुँह में घुसकर चूस रही थी। मैंने उसके कान और जोर से खींचे तो वो चीख पड़ी, “राहुल… दर्द हो रहा है… लेकिन और खींच… मेरी चूत गीली हो रही है।” मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले। उसके गोरे स्तन बाहर निकल आए। काले निप्पल्स खड़े हो चुके थे। मैंने एक स्तन मुँह में लिया और चूसने लगा जबकि दूसरे हाथ से कान खींच रहा था।
अक्षरा ने मेरी पैंट खोली और मेरा लंड बाहर निकाला। “वाह… कितना मोटा लंड है तेरा। आज मेरी चूत फाड़ दे।” वो घुटनों के बल बैठ गई और लंड चूसने लगी। उसकी गर्म साँसें मेरे लंड पर पड़ रही थीं। वो लंड को पूरा मुँह में ले रही थी और गले तक ले जा रही थी। मैं उसके कान खींच रहा था, “चूस और जोर से रंडी… तेरे कान लाल कर दूंगा।” अक्षरा और तेजी से चूसने लगी, “उम्म्म… लंड का स्वाद अच्छा है…”
फिर मैंने उसे उठाया और बेड पर लिटा दिया। उसके पैर फैलाए और चूत चाटने लगा। अक्षरा की चूत पूरी गीली हो चुकी थी। मैं जीभ से उसके क्लिट को चाट रहा था और बीच-बीच में उसके कान खींच रहा था। “आह्ह राहुल… कान मत छोड़… चूत में उंगली डाल… मुझे चोद…”
मैंने दो उंगलियाँ उसकी चूत में डालीं और अंदर-बाहर करने लगा। अक्षरा चीख रही थी, “और जोर से… मेरी चूत फाड़ दे… कान खींच… मुझे तेरी गुलाम बना ले।” उसकी चूत से रस निकल रहा था जो मेरे हाथ पर बह रहा था। मैंने उसके कान और जोर से खींचे तो वो झड़ गई, “आह्ह्ह… मैं झड़ गई… अब तू मुझे चोद।”
मैं उसके ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा। अक्षरा ने खुद ही लंड पकड़कर अंदर डाल लिया। “देख कैसे मेरी चूत लंड निगल रही है।” मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। हर धक्के के साथ उसके कान खींच रहा था। अक्षरा के स्तन उछल रहे थे। “राहुल… और तेज… मेरी गांड भी मार… कान खींचते हुए।”
मैंने उसे उल्टा कर दिया। अब वो कुत्ते वाली पोज में थी। मैंने उसकी गांड के दोनों तरफ हाथ मारा और कान खींचे। लंड उसकी चूत में घुसा दिया। “आह्ह… तेरी गांड लाल हो रही है… कान लाल कर दूंगा।” अक्षरा चीख रही थी, “चोद मुझे… मेरी चूत का रस निकाल… कान और जोर से।” मैं तेजी से चोद रहा था। उसकी चूत का रस मेरे लंड पर चिपक रहा था।
फिर मैंने लंड निकालकर उसकी गांड में डालने की कोशिश की। अक्षरा बोली, “पहले थूक लगा… मेरी गांड टाइट है।” मैंने थूक लगाया और लंड घुसा दिया। अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह… दर्द… लेकिन और खींच कान… गांड फाड़ दे।” मैं उसके कान खींचते हुए गांड मार रहा था। दोनों छेदों से रस निकल रहा था।
हम घंटों चोदते रहे। अक्षरा ने कई बार झड़कर मेरे लंड को गीला किया। आखिर में मैंने उसके मुँह में लंड डाला और अपना माल निकाल दिया। अक्षरा सब पी गई, “तेरा माल स्वादिष्ट है… अगली बार फिर कान खींचना।”
ये कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अगले हफ्ते भी हम मिले और वही खेल दोहराया। अक्षरा के कान अब लाल रहते हैं जब भी हम मिलते हैं। दोस्तों, अगर आपको ये कहानी पसंद आई तो कमेंट करना। मैं और कहानियाँ सुनाऊंगा।