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विशेष: Dehati Love In Jungle – जंगल में देहाती चुदाई का मजा — अनुशंसित

विशेष: Dehati Love In Jungle – जंगल में देहाती चुदाई का मजा — अनुशंसित

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ लेकिन हर साल छुट्टियों में अपने गाँव जाता हूँ। गाँव उत्तर प्रदेश के एक छोटे से देहाती इलाके में है जहाँ चारों तरफ खेत और जंगल हैं। पिछले साल की बात है जब मैं गाँव गया तो एक दिन जंगल में लकड़ी काटने गई एक लड़की से मुलाकात हो गई। उसका नाम सीमा था, उम्र करीब बीस साल, देहाती औरत जैसी मोटी-तगड़ी काया, बड़े-बड़े स्तन और चौड़ी कमर। उस दिन दोपहर का वक्त था, धूप तेज थी और जंगल में कोई नहीं था।

मैं अकेला घूम रहा था जब सीमा को देखा। वो पेड़ के नीचे लकड़ियाँ बाँध रही थी। उसकी साड़ी पसीने से भीग गई थी जिससे उसके बड़े स्तन साफ दिख रहे थे। मैं पास गया और बात करने लगा। पहले तो वो शर्मा गई लेकिन फिर हँसने लगी। हम बातों में मगन हो गए। सीमा ने बताया कि वो जंगल में अक्सर आती है और अकेली रहती है। धीरे-धीरे बातें सेक्स पर आ गईं। वो बोली, “विक्रम भैया, जंगल में कोई नहीं है, अगर तुम्हें मेरा शरीर पसंद है तो आज कुछ कर लो।” मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़ा और पास खींच लिया।

हम दोनों पेड़ के पीछे छुप गए। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा। उसके स्तन बाहर निकल आए, काले-काले निप्पल और भारी भारी बोब्स। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। सीमा चीख पड़ी, “आह्ह्ह विक्रम, चूसो और जोर से, मेरी चुचियाँ चूस लो।” मैंने दूसरा स्तन भी हाथ में लिया और जोर-जोर से दबाने लगा। उसकी साँस तेज हो गई। मैंने उसकी साड़ी ऊपर उठाई। उसके नीचे कुछ नहीं था, सीधा उसकी गीली चूत दिख रही थी। बालों से भरी, मोटी मोटी चूत के होठ और अंदर से रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली और हिलाने लगा। सीमा मचलने लगी, “हाँ विक्रम, मेरी चूत में उंगली डालो, और गहरा करो, मेरी चूत फाड़ दो।”

मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड खड़ा हो चुका था, मोटा और लंबा, नसों से भरा। सीमा ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। “कितना बड़ा लंड है तुम्हारा, आज मेरी चूत फट जाएगी।” उसने मुंह में लिया और चूसने लगी। उसकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर उसका मुंह आगे पीछे किया। “चूस सीमा, मेरे लंड का रस पी ले।” वो जोर-जोर से चूस रही थी, थूक से मेरा लंड चमक रहा था।

फिर मैंने उसे पेड़ के तने से टिका दिया। उसकी पीठ मेरी तरफ, मैंने उसकी गांड को थपथपाया। मोटी मोटी गांड, सफेद और नरम। मैंने अपनी उंगली उसकी गांड में डाली। सीमा चीखी, “आह्ह्ह, गांड मत मारो अभी, पहले चूत चोदो।” लेकिन मैंने लंड उसकी चूत पर रखा और एक जोर का धक्का मारा। मेरा लंड आधा अंदर घुस गया। सीमा चीख पड़ी, “मर गई रे, इतना मोटा लंड, मेरी चूत फट गई।” मैंने और जोर लगाया। पूरा लंड अंदर घुस गया। उसकी चूत गर्म और तंग थी, रस बह रहा था। मैं धक्के मारने लगा।

“छोड़ सीमा, तेरी चूत का मालिक बन गया हूँ।” वो चिल्ला रही थी, “हाँ विक्रम चोदो मुझे, जंगल में चोदो, मेरी चूत फाड़ दो, और जोर से।” मैं तेज-तेज धक्के मार रहा था। उसकी बोब्स हिल रहे थे। पसीना दोनों के शरीर से बह रहा था। जंगल में सिर्फ हमारी चुदाई की आवाजें आ रही थीं – थप थप, चिक चिक, सीमा की चीखें। मैंने उसकी चूत से लंड निकाला और थोड़ा रस चखा। फिर फिर से घुसाया।

हमने पोजीशन बदली। सीमा घुटनों के बल बैठ गई। मैं पीछे से उसकी चूत में लंड डालकर चोदने लगा। एक हाथ से उसकी गांड थपथपा रहा था। “ले सीमा, मेरी देहाती रांड, तेरी चूत आज फूल जाएगी।” वो आगे झुक गई और बोली, “मेरा लंड चूसने दो।” मैंने लंड निकाला और उसके मुंह में डाल दिया। वो अपना रस चख रही थी। फिर मैंने उसे लिटा दिया और ऊपर चढ़ गया। मिशनरी पोजीशन में लंड अंदर डाला। उसके स्तनों को दबाते हुए चोद रहा था। सीमा के पैर मेरे कंधों पर थे। मैं गहराई तक जा रहा था।

लगभग बीस मिनट तक चोदा। फिर मैंने कहा, “अब गांड मारता हूँ।” सीमा बोली, “धीरे से, पहली बार है।” मैंने थूक लगाया और लंड उसकी गांड में डाला। वो दर्द से चीखी लेकिन फिर मजे लेने लगी। “हाँ, गांड चोदो, अब दोनों छेद मेरे हो गए।” मैं तेजी से चोद रहा था। उसकी गांड लाल हो गई थी।

आखिर में मैंने लंड निकाला और उसके स्तनों पर झड़ गया। गाढ़ा रस उसके बोब्स पर फैल गया। सीमा ने उसे उंगलियों से लगाया और चाट लिया। हम दोनों थककर लेट गए। जंगल में हवा चल रही थी। सीमा बोली, “विक्रम, अब रोज जंगल आना, मेरी चूत को तुम्हारा लंड चाहिए।”

(यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती, हमने अगले दिन फिर मिलकर और लंबे समय तक चुदाई की, सीमा की चूत और गांड दोनों को अच्छे से चोदा, रस निकाला, चूसा, थपथपाया और पूरी देहाती स्टाइल में जंगल की हर हरियाली के बीच अपनी भूख मिटाई। सीमा की मोटी जांघें, पसीने से भीगी चूत, मेरे लंड पर चढ़कर कमंडल की तरह घुमाना, सब कुछ यादगार था। हमने कई बार पानी पिया, फिर शुरू किया, उसकी चीखें जंगल में गूंजती रहीं। अंत में दोनों संतुष्ट होकर गाँव लौटे लेकिन अगली मुलाकात का वादा किया।)

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