नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। आज मैं आपको अपनी असली कहानी सुनाता हूँ कि आखिर हम इंडियंस किस उम्र में असली गर्लफ्रेंड बनाते हैं और फिर उससे कैसे चुदाई शुरू होती है। मेरी उम्र उन्नीस साल की थी जब कॉलेज में पहली बार मुझे गर्लफ्रेंड मिली। दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस में बीए कर रहा था। हॉस्टल में रहता था। लड़कियों से बात करने की हिम्मत नहीं होती थी। लेकिन फिर अनन्या मिली। वो भी मेरी क्लास में ही थी। उम्र अठारह साल की, लेकिन शरीर देखकर लगता ही नहीं था। कद पाँच फुट पाँच इंच, गोरी चमड़ी, भारी-भारी स्तन जो टी-शर्ट में फटे पड़ते थे, और कमर इतनी पतली कि हाथ में आ जाए। गोल-गोल गाँड जो जींस में उभरी रहती थी।
पहले दोस्त बन गए। क्लास के बाद कॉफी, लाइब्रेरी में बैठना, फिर धीरे-धीरे फोन पर बातें। एक शाम बारिश में हम दोनों स्कूटर पर थे। अनन्या मेरे पीछे बैठी थी। उसके स्तन मेरी पीठ से सटे हुए थे। बारिश में भीगने से उसकी ब्रा का निशान साफ दिख रहा था। मैंने पूछा, “अनन्या, तू कभी किसी लड़के के साथ रही है?” वो हँसी और बोली, “अभी तक नहीं, लेकिन तू अगर चाहे तो…” उसी रात हॉस्टल के पीछे वाले पार्क में हमने पहली बार किस किया।
उसके होंठ नरम थे, जीभ से चूसने लगा। हाथ उसके स्तनों पर रखा। ब्रा के ऊपर से दबाया। वो साँसें लेने लगी, “अर्जुन… धीरे से, कोई देख लेगा।” लेकिन मैं रुका नहीं। उसकी टी-शर्ट ऊपर उठाई। काले ब्रा में उसके स्तन बंद थे। ब्रा का हुक खोला। दो बड़े, गोल स्तन बाहर निकल आए। निप्पल गुलाबी और खड़े हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। अनन्या कराहने लगी, “आह… चूस ले… मेरा दूध निकाल दे।” दूसरा स्तन हाथ में दबाया। उंगलियों से निप्पल को मरोड़ा।
फिर उसकी जींस का बटन खोला। हाथ अंदर डाला। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। पतली सी पैंटी के अंदर उंगलियाँ फिराई। “कितनी गर्म है तेरी चूत,” मैंने कहा। वो बोली, “तेरे लंड के लिए ही गीली हुई है।” मैंने उसकी पैंटी नीचे उतारी। चूत साफ शेव की हुई, होंठ फूले हुए, रस टपक रहा था। उंगली अंदर डाली। वो चीख पड़ी, “आह… उंगली मत डाल, लंड डाल।” लेकिन हम दोनों वर्जिन थे। इसलिए पहले उंगली से ही चोदने लगा। दो उंगलियाँ अंदर-बाहर कीं। उसका रस मेरे हाथ पर बहने लगा।
अगले हफ्ते हमने होटल बुक किया। कमरा छोटा था, लेकिन बिस्तर बड़ा। अनन्या ने कपड़े उतारे। पूरा नंगा शरीर सामने था। स्तन लटक रहे थे, चूत के बाल नहीं थे, गाँड गोल और कसकदार। मैंने भी कपड़े फेंके। मेरा लंड खड़ा हो चुका था, सात इंच लंबा, मोटा, नसें उभरी हुई, लाल सिरा चमक रहा था। अनन्या ने लंड हाथ में लिया। “कितना बड़ा है तेरा लंड… मेरा मुंह नहीं भरेगा।” वो घुटनों पर बैठ गई और लंड चूसने लगी। जीभ से सिरे को चाटा, फिर पूरा मुंह में लिया। गले तक ले गई। “ग्लक… ग्लक…” की आवाजें आने लगीं। लार उसके होंठों से टपक रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह में चोदना शुरू किया।
फिर उसे बिस्तर पर लिटाया। टाँगें फैलाईं। चूत के पास मुंह लगाया। जीभ से चूत चाटने लगा। “आह… चूत चाट… पूरा रस पी ले,” वो चीख रही थी। मैंने उसके चूत के होंठ चूसे, क्लिट को काटा, जीभ अंदर डाली। उसका शरीर काँप रहा था। “अर्जुन… अब डाल… फाड़ दे मेरी चूत।” मैं ऊपर आया। लंड उसके चूत के मुंह पर रखा। धीरे से दबाया। सिरा अंदर गया। “आह… दर्द हो रहा है,” वो बोली। लेकिन मैं रुका नहीं। आधा लंड अंदर डाला। उसकी चूत कसी हुई थी। खून की बूंदें निकलीं। फिर पूरा लंड अंदर घुसा दिया। वो चीख पड़ी, “मर गई… पूरा लंड अंदर… चोद मुझे।”
मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। “थप… थप… थप…” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चोदते हुए चूसा। अनन्या बोली, “मेरी चूत फाड़ डाल… मेरा रस निकाल… मैं तेरी रंडी हूँ।” मैंने उसकी टाँगें कंधों पर रखीं और और गहराई से चोदने लगा। लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। उसकी चूत का रस मेरे लंड पर चिपक रहा था।
फिर उसने मुझे नीचे लिटाया और ऊपर चढ़ गई। लंड अपनी चूत में डाला और कूल्हे हिलाने लगी। “देख… कैसे चोद रही हूँ तुझे… तेरी गर्लफ्रेंड तेरे लंड पर बैठकर चुद रही है।” उसके स्तन मेरे चेहरे पर लटक रहे थे। मैंने दोनों स्तन हाथों में लिए और दबाए। वो और तेज़ी से कूल्हे मारने लगी। “आह… आह… मैं झड़ने वाली हूँ…” उसका शरीर काँपा और चूत से गरम-गरम रस निकलकर मेरे लंड पर बहने लगा।
मैंने उसे फिर पलटा। कुत्ते वाली पोजीशन में डाला। गाँड को थपथपाते हुए चोदने लगा। “तेरी गाँड भी मारूँ क्या?” वो बोली, “हाँ… लेकिन पहले चूत ही फाड़।” मैंने लंड निकाला और थोड़ा सा उसकी गाँड में डाला। वो चीखी, “दर्द… निकाल…” लेकिन मैंने सिर्फ सिरा डाला और फिर चूत में वापस घुसा दिया। घंटे भर तक चोदा। आखिर में लंड निकालकर उसके स्तनों पर झड़ गया। गरम-गरम वीर्य उसके स्तनों और चेहरे पर फैल गया।
उस रात हम तीन बार चोदे। सुबह तक उसकी चूत सूज गई थी। लंड पर खून और रस के निशान थे। अनन्या बोली, “उन्नीस साल की उम्र में ही गर्लफ्रेंड मिल गई… अब रोज चोदेगा ना?” मैंने कहा, “हाँ, तेरी चूत अब मेरी है।”
बाद में हम दोनों ने और भी जगहों पर चुदाई की। हॉस्टल के कमरे में, पार्क में रात को, और एक बार तो कार में भी। हर बार उसकी चूत और भी गीली होती थी। वो बोला करती, “तेरा लंड मेरी चूत का मालिक है।”
हमारी उम्र उन्नीस-बीस साल की थी जब असली चुदाई शुरू हुई। इंडियंस में ज्यादातर यही उम्र होती है जब गर्लफ्रेंड बनती है और फिर लंड-चूत की मस्ती शुरू होती है। अनन्या आज भी मेरी गर्लफ्रेंड है। हर हफ्ते नई-नई पोजीशन में चोदते हैं। उसकी चूत अब और भी ज्यादा रसदार हो गई है।
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि हर रात नई चुदाई की तैयारी रहती है।)