नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ और एक छोटी सी प्रोडक्शन कंपनी में असिस्टेंट डायरेक्टर का काम करता हूँ। स्टार प्लस के सीरियल्स में अक्सर एक्स्ट्रा काम मिल जाता है। पिछले साल एक नए शो में काम करते हुए मेरी मुलाकात अक्षरा से हुई। अक्षरा स्टार प्लस के उस पॉपुलर सीरियल की लीड एक्ट्रेस थी, जिसका नाम था “अक्षरा का नाटक”। वो सीरियल में प्यारी बहू का रोल निभाती थी, लेकिन असल जिंदगी में वो बिल्कुल अलग थी।
पहली मुलाकात शूटिंग के सेट पर हुई। अक्षरा उम्र में मेरे से दो-तीन साल बड़ी थी, शादीशुदा, लेकिन पति विदेश में था। सीरियल में वो साड़ी पहनकर बहुत भोली लगती थी, लेकिन असल में उसके शरीर का आकर्षण देखकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता था। उसके बड़े-बड़े स्तन, मोटी कमर, और वो गोल-गोल गोलियां जैसी गांड… हर शॉट में मेरा ध्यान भटक जाता था।
एक दिन शूटिंग खत्म होने के बाद सब चले गए। अक्षरा ने मुझे बुलाया, “राहुल, मेरे फ्लैट चलो, स्क्रिप्ट डिस्कस करनी है।” मैं समझ गया कि बात सिर्फ स्क्रिप्ट की नहीं है। उसके फ्लैट में घुसते ही उसने दरवाजा बंद किया और सीधे मेरे पास आकर बोली, “राहुल, मुझे पता है तू मुझे घूरता रहता है। आज से नाटक बंद, असली चुदाई शुरू कर।”
उसने अपनी साड़ी उतार दी। नीचे ब्लाउज और पेटीकोट में वो खड़ी थी। उसके स्तन ब्लाउज से फटते हुए लग रहे थे। मैंने तुरंत उसे दीवार से लगाकर चूमना शुरू कर दिया। उसकी जुबान मेरी जुबान से लिपट गई। मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले। दो भारी-भारी, गोरे-गोरे स्तन बाहर निकल आए, निप्पल सख्त और गुलाबी। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। अक्षरा चीखने लगी, “आह्ह्ह… राहुल, तेरे मुंह में मेरा स्तन ले ले, चूस ले मेरे मम्मे!”
मैंने दूसरा स्तन भी चूसा, दांतों से निप्पल काटा तो वो और जोर से चीखी। फिर मैंने उसके पेटीकोट की डोरी खींची। वो पूरी नंगी हो गई। उसकी चूत साफ शेव की हुई थी, होंठ मोटे और गीले। मैंने उंगली डाली तो अंदर से गरम रस बह रहा था। “अक्षरा, तेरी चूत कितनी गीली है!” मैंने बोला। वो बोली, “तेरे लंड के लिए ही गीली हुई है, अब चोद मुझे!”
मैंने अपना पैंट उतारा। मेरा लंड सात इंच का, मोटा और नसों से भरा हुआ बाहर आया। अक्षरा ने उसे हाथ में लिया और बोली, “वाह, कितना बड़ा लंड है! स्टार प्लस वाले नाटक में तो ऐसा लंड कभी नहीं दिखाते।” उसने घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को मुंह में लिया। उसकी गर्म सांस और गीली जुबान ने मेरा लंड चाटा, चूसा। वो गले तक ले रही थी, “ग्लुक-ग्लुक” की आवाज आ रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर जोर से मुंह चोदना शुरू कर दिया।
फिर मैंने उसे बेड पर लिटाया। उसकी टांगें फैलाईं और सीधे उसकी चूत पर मुंह मार दिया। उसकी चूत का स्वाद नमकीन और मीठा था। मैंने उसकी चूत चाटी, जीभ अंदर डाली, क्लिटोरिस चूसा। अक्षरा पागल हो रही थी, “आह्ह्ह… राहुल, मेरी चूत खा ले! तेरी जीभ से मेरी चूत फट रही है!” उसका रस मेरे मुंह में भर रहा था।
अब समय था असली चुदाई का। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार झटका मारा। आधा लंड अंदर घुस गया। अक्षरा चीख पड़ी, “मादरचोद, धीरे! तेरा लंड बहुत मोटा है!” लेकिन मैं रुका नहीं। दो-तीन झटकों में पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया। उसकी चूत गरम, तंग और गीली थी। मैं जोर-जोर से चोदने लगा। “थप-थप-थप” की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। अक्षरा बोली, “हां, राहुल, मेरी चूत फाड़ दे! स्टार प्लस का नाटक भूल जा, असली चुदाई कर!”
मैंने उसे कुत्ते वाली पोज में करवाया। उसकी गांड ऊपर उठाकर मैं पीछे से चोदने लगा। उसकी गांड के दो गोल टुकड़े मेरे हाथ में आ गए। मैंने उन्हें थपथपाया, खींचा। फिर मैंने लंड निकालकर उसकी गांड पर रखा। अक्षरा बोली, “नहीं, गांड मत मार, दर्द होगा!” लेकिन मैंने थूक लगाकर धीरे से दबाया। आधा लंड उसकी गांड में घुस गया। वो चीख रही थी, “आह्ह्ह… मर गई! तेरी लंड मेरी गांड फाड़ रहा है!” मैंने धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाई। अब पूरा लंड उसकी गांड में जा रहा था।
हम दोनों पसीने से तर हो गए थे। मैंने उसे उल्टा लिटाकर ऊपर से चोदा। उसके स्तन मेरे हाथ में दब रहे थे। अक्षरा का ऑर्गेज्म आ गया, उसकी चूत और गांड दोनों सिकुड़ रही थीं। “राहुल, मैं झड़ रही हूं!” वो चीखी। मैंने भी अपना गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया।
लेकिन हम रुके नहीं। पूरी रात हमने अलग-अलग पोजीशन में चोदाई की। सुबह होते-होते अक्षरा बोली, “राहुल, ये हमारा सीक्रेट रहेगा। स्टार प्लस का नाटक चलता रहेगा, लेकिन असली नाटक तेरे लंड और मेरी चूत-गांड़ के बीच चलेगा।”
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